हूल दिवस 2026 पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो को श्रद्धांजलि दी
जल, जंगल, जमीन और अस्मिता की रक्षा के लिए उनका संघर्ष आज भी प्रेरणास्रोत है।
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30 जून 1855 को संताल हूल (विद्रोह) की ऐतिहासिक शुरुआत की याद में पूरे झारखंड में हूल दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अमर शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान जल, जंगल, जमीन, भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष की अमर प्रेरणा है।
भोगनाडीह की धरती से शहीदों को ‘हूल जोहार’
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हूल दिवस पर अमर शहीदों को ‘हूल जोहार’ अर्पित किया। उन्होंने शहीदों के माता-पिता चुन्नी मांझी और सुबी हांसदा को भी नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया।
अन्याय के खिलाफ संघर्ष आज भी प्रासंगिक : CM
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1855 में संताल हूल के दौरान अन्याय और शोषण के खिलाफ उठी आवाज आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि झारखंड के वीर पुरखों ने यह साबित किया कि सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए हर संघर्ष स्वीकार है, लेकिन अन्याय के सामने झुकना स्वीकार नहीं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘अबुआ सरकार’ के संकल्प के तहत न्यायपूर्ण, समतामूलक और शोषणमुक्त झारखंड के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्यपाल और अन्य नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि
हूल दिवस पर राज्य के कई प्रमुख नेताओं ने भी अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा और साहस की प्रेरणा देता रहेगा।
विधायक कल्पना सोरेन ने कहा कि शहीदों का संघर्ष हमें अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने की सीख देता है।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संताल हूल भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे बड़े जनआंदोलनों में से एक था, जिसने स्वाभिमान और आजादी की अलख जगाई।