CAG रिपोर्ट को लेकर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, बोले- “खर्च करने में भी फेल रही हेमंत सरकार”
Ranchi: झारखंड में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर राज्य के बजट और केंद्र प्रायोजित योजनाओं की राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि CAG की रिपोर्ट ने राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं पर खर्च को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार केंद्र से पर्याप्त राशि नहीं मिलने की बात करती है, लेकिन उपलब्ध राशि का भी पूरी तरह उपयोग नहीं कर पा रही है।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं की राशि खर्च नहीं कर पाई सरकार: बाबूलाल
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि राज्य में संचालित 13 केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र से मिली करीब 31 प्रतिशत राशि का उपयोग राज्य सरकार नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े होते हैं।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार को केंद्र से मिलने वाली राशि को लेकर अक्सर शिकायत रहती है, लेकिन CAG की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि जो राशि उपलब्ध कराई गई, उसे भी पूरी तरह खर्च करने में सरकार सफल नहीं रही।
टेंडर प्रक्रिया में भी अनियमितता का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र में भी राज्य सरकार बजट की पूरी राशि खर्च नहीं कर पाई।
उनके मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2023-24 में निर्माण क्षेत्र के लिए करीब ₹20 हजार करोड़ की राशि का प्रावधान था, लेकिन सरकार लगभग ₹18 हजार करोड़ ही खर्च कर सकी।
₹1.60 लाख करोड़ से अधिक के उपयोगिता प्रमाण पत्र का मुद्दा
बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि 31 मार्च 2025 तक करीब ₹1,60,565 करोड़ की उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) सरकार पेश नहीं कर सकी।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इतनी बड़ी राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित हैं तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकारी खजाने से निकली राशि का वास्तविक उपयोग किस तरह और कहां हुआ।
स्वास्थ्य विभाग पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग के खर्च का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े दावे करने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग उपलब्ध राशि का पूरा उपयोग नहीं कर सका और कुल राशि में से करीब 40 प्रतिशत राशि का ही उपयोग किया गया।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में बजट का अपेक्षित इस्तेमाल नहीं होना गंभीर विषय है।
“केंद्र और राज्य दोनों की राशि खर्च करने में असफल सरकार”
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार विकास की लंबी-लंबी बातें करती है, लेकिन केंद्र प्रायोजित योजनाओं और अपने बजट की राशि को खर्च करने में ही सक्षम नहीं है।
उन्होंने कहा कि CAG रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि विभिन्न योजनाओं के लिए उपलब्ध राशि का समय पर उपयोग क्यों नहीं किया गया।
