JSBCL के 47.83 लाख रुपये गबन मामले में पीयूष प्रताप सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका, बेल खारिज; 2 महीने में ट्रायल पूरा करने का आदेश
रांची: झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JSBCL) की पिठौरिया स्थित कंपोजिट शॉप नंबर-43 से जुड़े करीब 47.83 लाख रुपये के कथित गबन मामले में आरोपी पीयूष प्रताप सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को मामले की सुनवाई दो महीने के भीतर पूरी कर अंतिम फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।
मामला पिठौरिया थाना कांड संख्या 148/2024 से जुड़ा है। पीयूष प्रताप सिंह बिहार के औरंगाबाद के रहने वाले हैं और आरोप है कि JSBCL की दुकान में सेल्समैन के रूप में काम करने के दौरान आपराधिक साजिश के तहत सरकारी राजस्व के गबन में उनकी भूमिका रही।
21 दिसंबर 2024 से जेल में बंद हैं आरोपी
पीयूष प्रताप सिंह 21 दिसंबर 2024 से जेल में हैं। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनकी ओर से दलील दी गई कि पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी 2026 को चार महीने के भीतर गवाहों की गवाही पूरी करने का निर्देश दिया था और ऐसा नहीं होने पर दोबारा जमानत के लिए आवेदन करने की छूट दी थी।
आरोपियों की ओर से अदालत को बताया गया कि इसके बाद दो और गवाहों की गवाही दर्ज हो चुकी है। लंबे समय से जेल में रहने और जांच में सहयोग करने के आधार पर जमानत देने की मांग की गई।
राज्य सरकार ने जमानत का किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से आरोपी की जमानत का विरोध किया गया। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अब तक हुई तीन प्रमुख गवाहों की गवाही अभियोजन के आरोपों का समर्थन करती है।
सरकार ने यह भी तर्क दिया कि मामला सरकारी राजस्व की बड़ी रकम से जुड़ा है और आरोपी को जमानत मिलने पर उसके फरार होने या साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मामले की परिस्थितियों और अब तक सामने आए साक्ष्यों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल अपेक्षाकृत अधिक समय जेल में बिताना अपने आप में जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई दो महीने के भीतर पूरी कर अंतिम निर्णय सुनाया जाए।
