झारखंड की सियासत में हलचल: आजसू को झटका? हरेलाल महतो के BJP में जाने की चर्चा, गिरिडीह उपचुनाव ने बढ़ाई सरगर्मी
रांची/गिरिडीह: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर सियासी गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। एक ओर एनडीए के भीतर संभावित बदलावों को लेकर चर्चा है, तो दूसरी ओर गिरिडीह विधानसभा सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होने लगी हैं। हालांकि, हरेलाल महतो के भाजपा में शामिल होने की बात फिलहाल अटकलों और राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित है।
हरेलाल महतो के पाला बदलने की चर्चा
आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव और ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हरेलाल महतो को लेकर भाजपा में जाने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज है। उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल से आजसू पार्टी का नाम हटाए जाने के बाद इन अटकलों को और हवा मिली है।
हरेलाल महतो ने 2024 के विधानसभा चुनाव में ईचागढ़ सीट से 51 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। ऐसे में अगर वह भविष्य में भाजपा का रुख करते हैं, तो इसका असर एनडीए के भीतर सीटों और संगठनात्मक समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी तक उनके भाजपा में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
गिरिडीह उपचुनाव पर सभी की नजर
गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव की संभावित प्रक्रिया ने झारखंड की राजनीति में गतिविधियां बढ़ा दी हैं। जेएमएम जहां अपनी सीट बरकरार रखने की रणनीति पर काम कर सकता है, वहीं भाजपा के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं।
भाजपा से दिनेश प्रसाद यादव, सुरेश साव, निर्भय शाहबादी और रवींद्र राय जैसे नामों की चर्चा राजनीतिक स्तर पर हो रही है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
JLKM के रुख पर भी नजर
गिरिडीह उपचुनाव में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। क्षेत्र में कुर्मी मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए सभी प्रमुख दल इस सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर सकते हैं।
यदि JLKM चुनाव मैदान में नहीं उतरती है, तो उसके समर्थक मतदाताओं का रुख क्या होगा, इसे लेकर अभी केवल राजनीतिक अनुमान लगाए जा रहे हैं। यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि ये मतदाता किसी एक दल के पक्ष में एकजुट होंगे।
उपचुनाव से पहले बढ़ेगी राजनीतिक सक्रियता
गिरिडीह सीट पर चुनाव कार्यक्रम और उम्मीदवारों की घोषणा के बाद राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल संभावित दावेदारों, दलों की रणनीति और नेताओं के संभावित पाला बदलने की चर्चाओं ने झारखंड की सियासत में हलचल जरूर बढ़ा दी है।
