नई दिल्ली | बिहार के चर्चित लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav और उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें FIR रद्द करने की मांग की गई थी। इस फैसले के बाद अब मामले की सुनवाई निचली अदालत में जारी रहेगी।
FIR रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार: Lalu Prasad Yadav
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने साफ कहा कि इस मामले में FIR को रद्द नहीं किया जा सकता। कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि लालू यादव और अन्य आरोपियों को अब ट्रायल का सामना करना होगा।
‘क्रिमिनल एंटरप्राइज’ जैसी टिप्पणी: Lalu Prasad Yadav
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहले ही इस मामले में लालू यादव समेत 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर चुकी है। निचली अदालत ने अपनी टिप्पणी में इस पूरे मामले को “क्रिमिनल एंटरप्राइज” की तरह अंजाम दिया गया बताया था, जिससे केस की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पेशी से मिली राहत: Lalu Prasad Yadav
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एक सीमित राहत भी दी है। लालू प्रसाद यादव की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी गई है। अब उनके वकील कोर्ट में उनकी ओर से पेश होंगे।
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?
यह मामला उस समय का है जब लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों से कम कीमत पर जमीनें लिखवाई गईं। सीबीआई का दावा है कि ये जमीनें लालू परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम ट्रांसफर की गईं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस केस को लेकर सियासी माहौल और गरमाने के आसार हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में ट्रायल के दौरान कई अहम खुलासे हो सकते हैं।
