Jharkhand Utpad Sipahi भर्ती परीक्षा 2026: पेपर लीक की साजिश नाकाम, 159 अभ्यर्थी होंगे ब्लैकलिस्ट

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित Jharkhand Utpad Sipahi भर्ती परीक्षा 2026 विवादों के घेरे में आ गई है। रविवार, 12 अप्रैल को आयोजित इस परीक्षा से ठीक पहले रांची पुलिस ने तमाड़ इलाके में एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया।

पुलिस ने रड़गांव स्थित एक संदिग्ध ठिकाने से 159 अभ्यर्थियों और गिरोह के 5 मुख्य सदस्यों को हिरासत में लिया है।

Jharkhand Utpad Sipahi : तमाड़ में छापेमारी और ‘सॉल्वर गैंग’ का पर्दाफाश

रांची पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि तमाड़ थाना क्षेत्र के एक भवन में बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को जुटाकर प्रश्नपत्र रटवाए जा रहे हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने वहां से अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक दस्तावेज, ब्लैंक चेक, कई मोबाइल फोन और लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं।

जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने प्रत्येक अभ्यर्थी से परीक्षा पास कराने के बदले 10 से 15 लाख रुपये का सौदा किया था। पुलिस ने गिरोह के सरगना अतुल वत्स को गिरफ्तार कर लिया है, जो पूर्व में भी कई राज्यों में पेपर लीक और भर्ती घोटालों में वांछित रहा है।

Jharkhand Utpad Sipahi : पेपर लीक या सोची-समझी ठगी?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ JSSC के बयान से आया है। आयोग के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि पुलिस द्वारा बरामद किए गए प्रश्नपत्र असली परीक्षा के पेपर से मेल नहीं खाते हैं।

अभ्यर्थियों पर कठोर कार्रवाई: भविष्य में परीक्षा देने पर रोक

JSSC ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हिरासत में लिए गए सभी 159 अभ्यर्थियों को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया है। आयोग के अनुसार, अनैतिक साधनों का सहारा लेने की कोशिश करने वाले ये छात्र अब भविष्य में JSSC द्वारा आयोजित किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे।

परीक्षा रद्द नहीं होगी, विपक्ष ने उठाए सवाल

राज्य के 8 जिलों में 370 केंद्रों पर आयोजित यह परीक्षा फिलहाल रद्द नहीं की जाएगी। आयोग का तर्क है कि मुख्य प्रश्नपत्र सुरक्षित था और गोपनीयता भंग नहीं हुई है।

हालांकि, इस घटना ने राज्य में एक बार फिर राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों ने JSSC की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और मामले की उच्च स्तरीय सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जब तक जांच पूरी न हो जाए, परीक्षा की पारदर्शिता पर संदेह बना रहेगा।

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