गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का अंत: झारखंड के सबसे बड़े अपराध नेटवर्क को बड़ा झटका, प्रिंस खान गिरोह पर बढ़ेगा दबाव

झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद राज्य के अपराध जगत में हलचल। जानिए उसके नेटवर्क, प्रिंस खान गिरोह पर असर और पुलिस की अगली रणनीति।

गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का अंत: झारखंड के सबसे बड़े अपराध नेटवर्क को बड़ा झटका, अब प्रिंस खान गिरोह पर भी बढ़ेगा दबाव

पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद बदल सकते हैं झारखंड के अपराध जगत के समीकरण, नेटवर्क पर एजेंसियों की पैनी नजर

Hazaribagh: झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद राज्य के संगठित अपराध जगत में हलचल तेज हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां इसे झारखंड में अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता मान रही हैं। लंबे समय तक जेल में रहने के बावजूद सुजीत सिन्हा का नेटवर्क सक्रिय बताया जाता था और जांच एजेंसियों के अनुसार वह जेल से भी अपने गिरोह का संचालन कर रहा था। रविवार रात साहिबगंज जेल से धनबाद जेल ले जाए जाने के दौरान कथित रूप से भागने की कोशिश में हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।

पलामू से शुरू हुआ था अपराध का सफर

पलामू जिले के रेड़मा मोहल्ले का रहने वाला सुजीत सिन्हा शुरुआत में स्थानीय स्तर पर सक्रिय अपराधी था, लेकिन समय के साथ उसने झारखंड के कई जिलों में अपना प्रभाव स्थापित कर लिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट, आपराधिक साजिश और संगठित अपराध सहित 50 से अधिक मामले दर्ज थे। उसका नेटवर्क पलामू के अलावा गढ़वा, लातेहार, चतरा, रांची, धनबाद, हजारीबाग, बोकारो समेत कई जिलों तक फैला हुआ था।

जेल से भी चलता रहा नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार जेल में बंद रहने के बावजूद सुजीत सिन्हा अपने सहयोगियों के माध्यम से रंगदारी, धमकी और अन्य आपराधिक गतिविधियों का संचालन करता था। कोयला कारोबार, सड़क निर्माण, ट्रांसपोर्ट, क्रशर और ठेकेदारी से जुड़े व्यवसायियों से लेवी वसूली के आरोप उसके गिरोह पर लगातार लगते रहे।

प्रिंस खान गिरोह पर बढ़ सकता है दबाव

अपराध मामलों पर नजर रखने वाले सूत्रों के अनुसार हाल के वर्षों में गैंगस्टर प्रिंस खान ने भी सुजीत सिन्हा के पुराने नेटवर्क और संपर्कों का लाभ उठाया। इसी नेटवर्क के जरिए धनबाद, रांची, जमशेदपुर, बोकारो और आसपास के क्षेत्रों में कारोबारियों को रंगदारी की धमकियों के कई मामले सामने आए। अब सुजीत सिन्हा की मौत के बाद माना जा रहा है कि प्रिंस खान गिरोह के लिए पुराने नेटवर्क का इस्तेमाल पहले जितना आसान नहीं रहेगा। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए उसके सक्रिय सहयोगियों पर कार्रवाई जरूरी होगी।

कई अपराधियों का रहा कथित ‘मेंटॉर’

सूत्रों के मुताबिक सुजीत सिन्हा अलग-अलग गिरोहों के साथ गठजोड़ करने में माहिर माना जाता था। उस पर कई युवकों को अपराध की दुनिया में लाने और अपने गिरोह से जोड़ने के आरोप भी लगते रहे। धनबाद के चर्चित अपराधी सूरज सिंह का नाम भी उसके नेटवर्क से जुड़ता रहा है।

कारोबारियों में फैलाई थी दहशत

वर्ष 2020 के दौरान धनबाद समेत कई जिलों में कारोबारियों को रंगदारी की धमकियां मिलने और फायरिंग की घटनाओं में सुजीत सिन्हा गिरोह का नाम सामने आया था। बाद में पुलिस ने अभियान चलाकर उसके कई सहयोगियों को गिरफ्तार किया, जबकि कुछ अपराधी मुठभेड़ों में मारे गए या घायल हुए।

कैसे हुई मुठभेड़

पुलिस के अनुसार सुजीत सिन्हा को साहिबगंज जेल से धनबाद जेल ले जाया जा रहा था। रास्ते में पुलिस वाहन में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किया जा रहा था। इसी दौरान उसने कथित तौर पर एक जवान का हथियार छीन लिया और भागने की कोशिश करते हुए पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।

अब नेटवर्क पर फोकस

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सुजीत सिन्हा की मौत के बाद अब उसके पूरे आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। पुलिस विशेष रूप से उन सहयोगियों की पहचान और गिरफ्तारी पर काम कर रही है जो जेल के बाहर रहकर रंगदारी और अन्य गतिविधियों का संचालन कर रहे थे।

बदल सकते हैं अपराध जगत के समीकरण

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी बड़े गैंगस्टर के खत्म होने के बाद उसके नेटवर्क पर कब्जे की होड़ शुरू हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड के अपराध जगत में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं। वहीं पुलिस इस मौके को संगठित अपराध के पूरे तंत्र को कमजोर करने के अवसर के रूप में देख रही है।

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