पलामू में जन्म प्रमाण पत्रों में कथित फर्जीवाड़ा, 33 संदिग्ध प्रमाण पत्र रद्द; डिजिटल सिग्नेचर और पोर्टल ID के दुरुपयोग पर FIR
मेदिनीनगर: पलामू में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। सदर अस्पताल, मेदिनीनगर यानी मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (MMCH) से जारी किए गए 33 जन्म प्रमाण पत्रों को जांच के बाद रद्द कर दिया गया है। अब अस्पताल स्तर पर इससे जुड़े अन्य प्रमाण पत्रों की भी जांच की जा रही है।
मामले में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सह जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार विजय कुमार सिंह के आवेदन पर मेदिनीनगर शहर थाना में कांड संख्या 351/2026, दिनांक 12 सितंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने BNS की धारा 336(3), 337, 340, 318(4) और 300 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पोर्टल ID और पासवर्ड के कथित दुरुपयोग का आरोप
दर्ज प्राथमिकी के आवेदन के अनुसार, जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने के लिए नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार से मामले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
अपने लिखित जवाब में अमित कुमार ने कथित तौर पर बताया कि काम की अधिकता के कारण अस्पताल प्रबंधक सुनीत श्रीवास्तव के मौखिक निर्देश पर शिव नारायण साव को जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने के काम में लगाया गया था।
आरोप है कि इसी दौरान शिव नारायण साव ने अस्पताल के जन्म प्रमाण पत्र पोर्टल की ID और पासवर्ड का कथित रूप से इस्तेमाल किया। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पोर्टल के माध्यम से गलत डिस्चार्ज टिकट तैयार किए गए और उनके आधार पर 33 जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए।
इन प्रमाण पत्रों को संबंधित लाभार्थियों के बीच वितरित किए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।
33 से अधिक प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी की आशंका
मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने शिव नारायण साव के कार्यकाल में तैयार किए गए अन्य जन्म प्रमाण पत्रों की भी जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में 33 से अधिक प्रमाण पत्रों में भी अनियमितता की आशंका जताई गई है। हालांकि, इन सभी प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस अब पोर्टल रिकॉर्ड, तैयार दस्तावेज, डिस्चार्ज टिकट और इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
पहले भी संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों पर उठे सवाल
पलामू में जन्म प्रमाण पत्रों को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। जुलाई 2025 में मेदिनीनगर नगर निगम कार्यालय के बाहर कथित फर्जी हस्ताक्षर से जन्म प्रमाण पत्र बनाए जाने के आरोप में एक दुकान को सील किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
इसके बाद अक्टूबर 2025 में भी MMCH से जारी कुछ संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों की जांच शुरू हुई थी। UIDAI के क्षेत्रीय कार्यालय रांची और सिविल सर्जन पलामू के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी।
समिति में डॉ. जितेंद्र सिंह, डॉ. अब्दुल अहद और डॉ. उदय सिंह शामिल थे। उस समय करीब 9 से 10 संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, उस जांच की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
नए मामलों ने बढ़ाई चिंता
अब 19 अगस्त 2026 को तान्या इसरा, माता का नाम जयनाब बीवी, पता चियांकी, मेदिनीनगर के नाम से जारी जन्म प्रमाण पत्र को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
वहीं, 22 जून 2026 को आरती कुमारी, पिता जितेंद्र कुमार सिंह और माता शीला कुमारी के नाम से जारी प्रमाण पत्र में जन्म तिथि 23 जनवरी 2020 दर्ज होने की बात सामने आई है।
दावा किया गया है कि अस्पताल के संबंधित जन्म रजिस्टर में उस तारीख को शीला कुमारी के प्रसव का रिकॉर्ड नहीं मिला। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अस्पताल की ओर से जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया और कथित डिजिटल सिग्नेचर के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मामले में MMCH के अधीक्षक डॉ. अजय कुमार का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
पुलिस जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
शहर थाना प्रभारी ज्योति लाल रजवार के अनुसार, मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच की जा रही है।
अब जांच का मुख्य बिंदु यह है कि कथित गड़बड़ी केवल इन 33 जन्म प्रमाण पत्रों तक सीमित है या अस्पताल से जारी अन्य प्रमाण पत्र भी इसकी जद में हैं।
पोर्टल रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेजों, जन्म रजिस्टर और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
