Jharkhand Mining News: 63 नॉन-वर्किंग खदानों की खंगाली कुंडली, 13 नीलामी के लिए तैयार; 13 को शो-कॉज
Ranchi: झारखंड में लंबे समय से बंद पड़ी खदानों को लेकर राज्य सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। खान विभाग ने कुल 72 नॉन-वर्किंग यानी अक्रियाशील खदानों की समीक्षा की थी। विभाग के सख्त रुख के बाद इनमें से 9 खदानों को दोबारा चालू कराया जा चुका है।
हालांकि, 9 खदानों के शुरू होने के बाद भी 63 खदानें अभी नॉन-वर्किंग स्थिति में हैं। विभाग की समीक्षा में इनके बंद रहने के पीछे अलग-अलग कानूनी, पर्यावरणीय, तकनीकी और प्रशासनिक कारण सामने आए हैं।
63 खदानों के बंद रहने की अलग-अलग वजहें
खान विभाग की समीक्षा के अनुसार, 63 अक्रियाशील खदानों में से 16 की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है। वहीं, नियमों का उल्लंघन करने या खनन कार्य शुरू नहीं करने वाली 13 खदानों की कंपनियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है।
इसके अलावा 16 खदानें पर्यावरण स्वीकृति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति से जुड़ी प्रक्रिया में अटकी हुई हैं।
अंतिम खनन बंद करने की योजना यानी माइन क्लोजर प्लान से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी नहीं होने के कारण 4 खदानें बंद हैं। वहीं, माइनिंग प्लान से जुड़ी तकनीकी और अन्य समस्याओं के कारण 10 खदानों में काम शुरू नहीं हो सका है।
जमीन विवाद, स्थानीय स्तर की अड़चन और अन्य प्रशासनिक कारणों से 16 खदानें भी लंबे समय से गतिरोध में हैं।
13 खदानें नीलामी के लिए तैयार
विभाग ने लंबे समय से बंद पड़ी और निष्क्रिय खदानों को नए सिरे से संचालित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।
विभागीय समीक्षा के मुताबिक, नियमों की अनदेखी करने वाली और लीज अवधि पूरी कर चुकी खदानों में से 13 खदानों को नीलामी के लिए तैयार किया गया है।
इन खदानों की दोबारा नीलामी से नए निवेशकों को मौका मिलने की उम्मीद है। साथ ही, खदानों के दोबारा संचालन से राज्य सरकार को राजस्व मिलने और खनन गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।
सरकार की निगरानी में आगे की कार्रवाई
खान विभाग ने बंद खदानों की स्थिति की अलग-अलग आधार पर समीक्षा कर संबंधित मामलों में कार्रवाई शुरू की है। जिन कंपनियों को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है, उनके जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, पर्यावरण मंजूरी, माइनिंग प्लान, भूमि विवाद और अन्य प्रशासनिक अड़चनों वाली खदानों में संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा कराने पर भी विभाग का जोर है।
कुल 72 नॉन-वर्किंग खदानों में से 9 को दोबारा चालू कराने के बाद अब विभाग के सामने 63 शेष खदानों को लेकर समाधान तलाशने और नियमों के मुताबिक कार्रवाई करने की चुनौती है।
