Hemant Soren Government Action: 312 अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई, 142 का वेतन रुका; 88 की सर्विस बुक में निंदा

हेमंत सरकार का बड़ा एक्शन: 312 अधिकारी-कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, वेतन रुका और सर्विस बुक में निंदा

हेमंत सरकार का बड़ा एक्शन: 312 अधिकारी-कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, वेतन रुका और सर्विस बुक में निंदा

रांची: झारखंड में सरकारी कामकाज में लापरवाही, अनुशासनहीनता और प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से 14 सितंबर 2026 के बीच कुल 312 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

इस कार्रवाई में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के साथ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और तकनीकी विभागों के इंजीनियर भी शामिल हैं।

लापरवाही और आदेश की अनदेखी पर कार्रवाई

सरकार की ओर से की गई कार्रवाई में सरकारी काम में देरी, फाइलों को लंबित रखने, उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी और कर्तव्य के प्रति लापरवाही जैसे मामलों को शामिल किया गया है।

सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में समयबद्धता, जवाबदेही और बेहतर कार्य संस्कृति को मजबूत करना बताया गया है।

142 मामलों में वेतन रोकने और स्पष्टीकरण का फैसला

आंकड़ों के मुताबिक, 142 मामलों में कर्मचारियों के खिलाफ कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए। इन मामलों में संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया और संबंधित अवधि का वेतन रोकने की कार्रवाई की गई।

इस कार्रवाई का उद्देश्य कर्मचारियों को अपने दायित्वों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना बताया गया है।

88 कर्मियों की सर्विस बुक में दर्ज हुई निंदा

उच्चाधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना और कार्यप्रणाली में लगातार लापरवाही के मामलों में 88 कर्मचारियों की सर्विस बुक में निंदा प्रविष्टि दर्ज की गई है।

सर्विस रिकॉर्ड में इस तरह की प्रविष्टि कर्मचारी की भविष्य की सेवा संबंधी प्रक्रियाओं, खासकर पदोन्नति आदि में प्रासंगिक हो सकती है।

54 मामलों में वेतन वृद्धि पर रोक

प्रशासनिक निर्देशों का उल्लंघन और अनुशासनहीनता पाए जाने पर 54 मामलों में एक या उससे अधिक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई है।

इन मामलों में वेतन वृद्धि को संचयी या असंचयी प्रभाव से रोकने का प्रावधान लागू किया गया है, जैसा कि संबंधित अनुशासनात्मक आदेशों में तय किया गया है।

28 गंभीर मामलों में निलंबन और विभागीय जांच

सबसे गंभीर मामलों में सरकार ने निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई भी की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वित्तीय अनियमितता और लंबे समय तक बिना पूर्व सूचना के अनधिकृत अनुपस्थिति से जुड़े 28 मामलों में निलंबन तथा कठोर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाने पर जोर

जनवरी से सितंबर 2026 के बीच हुई इन कार्रवाइयों से संकेत मिलता है कि सरकार सरकारी कार्यालयों में लापरवाही और अनुशासनहीनता के मामलों को लेकर सख्त रुख अपना रही है।

वेतन रोकने, सर्विस बुक में निंदा प्रविष्टि, वेतन वृद्धि पर रोक और निलंबन जैसी अलग-अलग कार्रवाई के जरिए कर्मचारियों और अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति जवाबदेह बनाने की कोशिश की जा रही है।

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