काठमांडू: नेपाल की राजनीति में बड़ा और नाटकीय घटनाक्रम सामने आया है। Balen Shah ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालते ही कड़ा रुख अपनाया है। शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों के भीतर शाम को हुई पहली कैबिनेट बैठक में सरकार ने एक बड़ा और विवादित फैसला लिया।
सरकार ने हाल के ‘Zen-G आंदोलन’ के दौरान हुई मौतों को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है। लंबी चली कैबिनेट बैठक में देश के कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे और सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों के जिम्मेदार लोगों को कानून के तहत सजा दी जाएगी।
पूर्व प्रधानमंत्री ओली पर कसा शिकंजा: Balen Shah
सरकार ने इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सेना प्रमुख को निर्देश देते हुए कहा है कि अगली सुबह होने से पहले दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाए। उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और अन्य आपराधिक मामलों में केस दर्ज करने की बात कही गई है।
सरकार का दावा: कानून के दायरे में फैसला: Balen Shah
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर लिया गया है। सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि ‘Zen-G आंदोलन’ के दौरान पुलिस की ओर से अंधाधुंध फायरिंग हुई थी, जिसमें कई लोगों की जान गई। आरोप है कि यह कार्रवाई तत्कालीन सरकार के आदेश पर की गई थी।
विपक्ष ने बताया ‘बदले की राजनीति’
वहीं, ओली की पार्टी CPN-UML ने इस फैसले को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और इससे देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं ओली
गौरतलब है कि के.पी. शर्मा ओली नेपाल के तीन बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं और देश की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई ने पूरे नेपाल में सियासी हलचल तेज कर दी है
