Jharkhand News: झरिया नगर निगम क्षेत्र से एक बेहद गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। साल 2019 से पहले जारी किए गए करीब 13 हजार जन्म प्रमाणपत्रों का रिकॉर्ड सरकारी सिस्टम से गायब हो गया है। इस चूक का असर अब हजारों परिवारों पर पड़ रहा है, जो अपने बच्चों के स्कूल एडमिशन, राशन कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी दस्तावेज बनवाने में परेशान हो रहे हैं।
2019 में पहली बार सामने आया था मामला: Jharkhand News
जानकारी के मुताबिक, 2 अप्रैल 2019 को झरिया अंचल के राज ग्राउंड स्थित पुराने कार्यालय से जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों के गायब होने का खुलासा हुआ था। उस समय के प्रोग्राम ऑफिसर ने इस मामले में झरिया थाना में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी।
एफआईआर में विभाग के दो कर्मियों की भूमिका पर संदेह जताया गया था। हालांकि, इतने वर्षों बाद भी न तो गायब रिकॉर्ड का कोई पता चल पाया और न ही मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने आई।
लोगों की बढ़ी परेशानी: Jharkhand News
स्थिति यह है कि पुराने जन्म प्रमाणपत्र में सुधार या डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट कराने पहुंचे लोगों को दफ्तर से निराश होकर लौटना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उनके पास पुराने रिकॉर्ड मौजूद नहीं हैं, इसलिए किसी प्रकार का सुधार संभव नहीं है। लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे पुराने रिकॉर्ड भूलकर “घर में जन्म” दिखाते हुए नया आवेदन करें। इससे आम नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
महीनों तक दफ्तरों के चक्कर: Jharkhand News
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नया प्रमाणपत्र बनवाने में दो से तीन महीने तक लग जाते हैं। इस दौरान उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और कई जगह सुविधा शुल्क के नाम पर पैसे मांगने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही की सजा अब आम जनता भुगत रही है। जिन दस्तावेजों के आधार पर बच्चों का भविष्य तय होता है, वही रिकॉर्ड अब सिस्टम से गायब हैं।
नगर निगम की सफाई: Jharkhand News
इस पूरे मामले पर धनबाद नगर निगम के सिटी मैनेजर विश्वनाथ भगत ने कहा कि स्थिति उतनी गंभीर नहीं है जितनी बताई जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी बिचौलिये के चक्कर में न पड़ें और सीधे कार्यालय से संपर्क करें। हालांकि, जमीनी स्तर पर लोगों की परेशानियां लगातार बनी हुई हैं और हजारों परिवार अब भी अपने जरूरी दस्तावेजों के लिए भटकने को मजबूर हैं।
