Thiruvananthapuram: पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने और कई राज्यों में नई सरकारों के गठन के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा केरल की राजनीति को लेकर हो रही है। राज्य में Congress समर्थित यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला नहीं हो पाया है। चुनाव परिणाम आने के एक हफ्ते बाद भी कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। अब मुख्यमंत्री चयन का पूरा मामला कांग्रेस हाईकमान के पास पहुंच चुका है और अंतिम फैसला राहुल गांधी तथा मल्लिकार्जुन खड़गे को करना है।
CM पद की रेस में तीन बड़े चेहरे: Congress
केरल कांग्रेस में फिलहाल मुख्यमंत्री पद के लिए तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं
1. रमेश चेन्निथला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय हैं। उनका गुट दावा कर रहा है कि वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर मुख्यमंत्री पद उन्हीं को मिलना चाहिए।
2. वी डी सतीशन
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे वी डी सतीशन को युवा और आक्रामक चेहरा माना जाता है। उन्हें IUML यानी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का भी मजबूत समर्थन मिलने की बात कही जा रही है।
3. के सी वेणुगोपाल
सबसे चर्चित नाम कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल का है। वे गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाते हैं और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ है। पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग चाहता है कि वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाए ताकि कांग्रेस संगठन में भी नए बदलाव किए जा सकें।
दिल्ली पहुंचा मामला: Congress
मुख्यमंत्री चयन को लेकर सहमति बनाने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने अजय माकन और मुकुल वासनिक को पर्यवेक्षक बनाकर केरल भेजा था। दोनों नेताओं ने विधायकों और अलग-अलग गुटों से बातचीत की, लेकिन कई दौर की बैठकों के बाद भी कोई सर्वसम्मति नहीं बन सकी। इसके बाद पूरा मामला दिल्ली भेज दिया गया।
वेणुगोपाल के समर्थन में लॉबिंग तेज: Congress
सूत्रों के मुताबिक, के सी वेणुगोपाल को बड़ी संख्या में विधायकों और सांसदों का समर्थन हासिल है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर भी वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 67 में से 43 विधायकों ने वेणुगोपाल के समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सतीशन गुट की अलग दलील: Congress
वी डी सतीशन समर्थक नेताओं का कहना है कि अगर वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो उन्हें अपनी लोकसभा सीट छोड़नी पड़ेगी और बाद में विधायक बनना होगा। इससे राज्य में उपचुनाव की स्थिति पैदा हो सकती है और कांग्रेस को अतिरिक्त राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
कांग्रेस के सामने बड़ा सवाल
अब सवाल सिर्फ मुख्यमंत्री चुनने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि कांग्रेस केरल में किस तरह की राजनीति का मॉडल अपनाना चाहती है
- क्या वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जाएगी?
- क्या युवा नेतृत्व को मौका मिलेगा?
- या फिर संगठन और गांधी परिवार के भरोसेमंद चेहरे को राज्य की कमान सौंपी जाएगी?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि केरल कांग्रेस के लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक टेस्ट है। ऐसे में मुख्यमंत्री चयन में देरी या खुली गुटबाजी पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है। अब सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है, जहां राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को केरल के अगले मुख्यमंत्री पर अंतिम फैसला लेना हैI
