कोल्हान प्रमंडल मुखिया सम्मेलन 2026: उत्कृष्ट पंचायतें सम्मानित, PESA नियमावली से सशक्त होगा ग्राम स्वशासन

चाईबासा। PESA : झारखंड सरकार की ‘मुखिया सम्मेलन’ श्रृंखला के तहत मंगलवार को चाईबासा में कोल्हान प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।

इस अवसर पर राज्य की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विभिन्न श्रेणियों—बाल हितैषी, महिला हितैषी, स्वस्थ, स्वच्छ एवं हरित और सामाजिक रूप से सुरक्षित पंचायतों के निर्माण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मुखियाओं को सम्मानित किया।

जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा के लिए पेसा (PESA) नियमावली ऐतिहासिक

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड सरकार ने पिछले 25 वर्षों से लंबित पेसा नियमावली को लागू कर राज्य की पारंपरिक ग्राम सभाओं को वास्तविक वैधानिक अधिकार दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम केवल कागजी नहीं है, बल्कि यह जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय समुदायों को निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्र में लाता है।

“पेसा नियमावली ने न केवल प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को मजबूती दी है, बल्कि लोकतंत्र की मूल भावना को जनभागीदारी के जरिए धरातल पर उतारा है।” – दीपिका पांडेय सिंह

लैंगिक समानता: ग्राम सभा सचिव पद पर महिलाओं की नियुक्ति

मंत्री ने राज्य सरकार की एक और महत्वपूर्ण पहल का जिक्र करते हुए कहा कि पेसा नियमावली के तहत ग्राम सभा के सचिव पद पर महिलाओं की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। यह राज्य में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे न केवल पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक समावेशी, संवेदनशील और पारदर्शी बनेगी।

विकास की नई परिभाषा: आत्मनिर्भर और संगठित पंचायतें

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि आज पंचायतें केवल सरकारी योजनाओं को लागू करने वाली इकाई नहीं रह गई हैं, बल्कि वे स्वतंत्र विकास केंद्र के रूप में उभर रही हैं। उन्होंने सम्मानित मुखियाओं की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके उन जमीनी प्रयासों की पहचान है, जो गांवों को आत्मनिर्भर और संगठित बना रहे हैं।

सरकार की प्रतिबद्धता

मंत्री ने दोहराया कि झारखंड सरकार पंचायतों को महज एक प्रशासनिक इकाई से आगे ले जाकर उन्हें विकास, सेवा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन के सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी तरह समर्पित है। कोल्हान की पंचायतों में दिख रहे सकारात्मक बदलाव इस बात का प्रमाण हैं कि विकास अब स्थानीय नेतृत्व और सामूहिक सहभागिता की नींव पर खड़ा है।

यह भी पढ़े: झारखंड में बड़ा फैसला! अब चतुर्थ वर्ग कर्मचारी भी बनेंगे बाबू

Exit mobile version