Ranchi: महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर झारखंड की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। Jharkhand Mukti Morcha (JMM) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उसकी मंशा पर सवाल उठाए हैं।
“परिसीमन और जनगणना पर स्पष्टता नहीं”: JMM
जेएमएम के महासचिव Supriyo Bhattacharya ने कहा कि संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को जिस तरह पेश किया गया, वह कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जब 2024 में इस विधेयक का समर्थन किया गया था, तब इसे जनगणना और परिसीमन के स्पष्ट आधार पर लागू किया जाना चाहिए था।
“2011 के आंकड़ों पर कैसे होगा फैसला?”: JMM
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि देश में 2011 के बाद से जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति में काफी बदलाव आए हैं। ऐसे में पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना उचित नहीं होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद कह रही है कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, तो फिर 2011 के आंकड़ों को आधार क्यों बनाया जा रहा है?
केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल: JMM
जेएमएम नेता ने आरोप लगाया कि परिसीमन के पीछे केंद्र सरकार की मंशा साफ नहीं है। उनका कहना है कि
- राज्यों से इस मुद्दे पर कोई व्यापक चर्चा नहीं की गई
- राजनीतिक दलों से भी संवाद नहीं हुआ
- इससे संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है
महिला आरक्षण के क्रियान्वयन पर भी उठे सवाल
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि 33% महिला आरक्षण को लेकर भी कई अस्पष्टताएं हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ राज्यों में महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाने जैसे मामले सामने आए हैं, जिससे महिलाओं के अधिकारों पर सवाल खड़े होते हैं।
पुरानी व्यवस्था का दिया उदाहरण
जेएमएम ने पंचायत स्तर पर महिला आरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि यह व्यवस्था Rajiv Gandhi के समय लागू हुई थी, जिसका उस समय विरोध भी हुआ था। महिला आरक्षण, जनगणना और परिसीमन जैसे मुद्दों को लेकर अब सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में यह बहस और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।
