Samrat Choudhary के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में एक बार फिर शराबबंदी कानून को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एनडीए सरकार के गठन के तुरंत बाद सहयोगी दल Rashtriya Lok Morcha (RLM) के विधायक Madhav Anand ने इस कानून की विस्तृत समीक्षा की मांग उठाई है।
सीएम से मुलाकात, रखी पुरानी मांग: RLM
पटना में गुरुवार को माधव आनंद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर राज्य में पिछले 10 वर्षों से लागू शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग दोहराई। मीडिया से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि अब समय आ गया है कि इस कानून के प्रभाव और परिणामों का गंभीर मूल्यांकन किया जाए।
“शराबबंदी जरूरी नहीं, अब जागरूकता पर हो फोकस”: RLM
माधव आनंद का कहना है कि बिहार में अब शराबबंदी कानून की अनिवार्यता नहीं रह गई है। उनके अनुसार नशामुक्ति के लिए जागरूकता अभियान ज्यादा प्रभावी हो सकता हैI कानून के जरिए पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं हो पाया है उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मुद्दे को वे पहले भी विधानसभा में उठा चुके हैं और कई विधायकों का समर्थन भी उन्हें मिला था।
“राजस्व का हो रहा बड़ा नुकसान”: RLM
विधायक ने आर्थिक पहलू को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि शराबबंदी के कारण राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। “बिहार को विकसित राज्य बनाने के लिए पर्याप्त राजस्व जरूरी है। मौजूदा स्थिति में आर्थिक क्षति हो रही है, इसलिए शराबबंदी पर पुनर्विचार होना चाहिए।”
अब सरकार के फैसले पर नजर
माधव आनंद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी बात सरकार के सामने रख दी है, अब फैसला सरकार को लेना है। बता दें कि बिहार में लागू शराबबंदी कानून को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस जारी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेता समय-समय पर इसके पक्ष और विपक्ष में अपनी राय रखते रहे हैं। नई सरकार के गठन के साथ यह मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है, और अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।