रिम्स-2 के विरोध में आदिवासी समाज का प्रदर्शन, CM आवास कूच से पहले कांके में रोके गए लोग

नगड़ी की जमीन बचाने की मांग, रिम्स-2 के खिलाफ सड़क पर उतरे किसान और आदिवासी

रिम्स-2 के विरोध में सड़कों पर उतरा आदिवासी समाज, CM आवास कूच के दौरान कांके में रोके गए प्रदर्शनकारी

रांची: नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को आदिवासी संगठनों और नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान और आदिवासी समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च शुरू किया, लेकिन प्रशासन ने उन्हें कांके ब्लॉक चौक के समीप रोक दिया।

आंदोलनकारियों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उपजाऊ कृषि भूमि पर किसी भी बड़े संस्थान का निर्माण स्वीकार नहीं करेंगे। उनका आरोप है कि नगड़ी क्षेत्र की जमीन खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां के अधिकांश परिवार कृषि पर निर्भर हैं। ऐसे में रिम्स-2 निर्माण के लिए इस भूमि का अधिग्रहण किसानों की आजीविका पर सीधा असर डालेगा।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनकी पहचान, संस्कृति और भविष्य से जुड़ा सवाल है। उनका कहना है कि सरकार को रिम्स-2 जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के लिए किसी बंजर या गैर-कृषि भूमि का चयन करना चाहिए, ताकि विकास भी हो और किसानों के हित भी सुरक्षित रहें।

मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने कांके ब्लॉक चौक के पास बैरिकेडिंग की थी। इसके बाद रैली को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश की गई। हालांकि आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भी शामिल हुए। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि सड़क मार्ग से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिली तो वे अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएंगे।

स्थिति को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर माहौल शांत बनाए रखने का प्रयास कर रहा है। वहीं आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और रिम्स-2 के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध जारी रखने की बात कह रहे हैं।

रिम्स-2 परियोजना को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब राज्य की राजनीति और विकास बनाम विस्थापन की बहस का महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है।

Exit mobile version