JPSC Lecturer Recruitment: रिजल्ट घोषित हुए बिना 700 लेक्चरर्स की नियुक्ति? 18 साल पुराने मामले पर फिर उठे सवाल
Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच वर्ष 2008 की विश्वविद्यालय लेक्चरर भर्ती एक बार फिर चर्चा में आ गई है। दावा किया जा रहा है कि 27 विषयों में 750 लेक्चरर्स की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान 21 विषयों का परिणाम आयोग से विधिवत स्वीकृत ही नहीं हुआ, इसके बावजूद 700 से अधिक लेक्चरर्स की नियुक्ति कर दी गई।
यह मामला उस समय और गंभीर हो गया था, जब जेपीएससी के तत्कालीन सचिव सह परीक्षा नियंत्रक रतिकांत झा ने वर्ष 2011 में झारखंड हाईकोर्ट में दायर अपने शपथ पत्र में इस संबंध में सवाल उठाए थे।
शपथ पत्र में क्या कहा गया था?
रतिकांत झा द्वारा 18 नवंबर 2011 को दायर शपथ पत्र के अनुसार, 27 विषयों में 750 लेक्चरर्स की नियुक्ति होनी थी। आरोप है कि इनमें से 21 विषयों के 700 से अधिक अभ्यर्थियों का परिणाम आयोग की बैठक में स्वीकृत नहीं हुआ था, न ही आयोग के सदस्यों ने उस पर हस्ताक्षर किए थे।
शपथ पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि नियुक्ति के लिए कोई अंतिम मेरिट सूची जारी नहीं की गई थी।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे कई सवाल
मामले को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आए हैं—
- यदि परिणाम आयोग से स्वीकृत नहीं था, तो नियुक्ति की अनुशंसा किस आधार पर की गई?
- विश्वविद्यालयों को चयनित अभ्यर्थियों की सूची किस दस्तावेज के आधार पर भेजी गई?
- मेरिट सूची के अभाव में अभ्यर्थियों की वरीयता कैसे तय की गई?
- आयोग की औपचारिक स्वीकृति के बिना नियुक्ति प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?
नियम क्या कहते हैं?
लोक सेवा आयोग की सामान्य प्रक्रिया के अनुसार, परीक्षा परिणाम तैयार होने के बाद उसे आयोग की बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाता है। अध्यक्ष और आयोग के सदस्यों की स्वीकृति एवं हस्ताक्षर के बाद ही परिणाम जारी किया जाता है। इसके बाद ही संबंधित विभाग या संस्थान को नियुक्ति की अनुशंसा भेजी जाती है।
इसी प्रक्रिया के संदर्भ में वर्ष 2008 की भर्ती को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
CBI की निगरानी में चल रही जांच
भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद पहले मामले की जांच निगरानी ब्यूरो को सौंपी गई थी। वर्तमान में यह मामला झारखंड हाईकोर्ट की निगरानी में CBI जांच के दायरे में बताया जाता है।
JPSC भर्ती परीक्षा मामले में CID की कार्रवाई जारी
इधर, JPSC की हालिया भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही CID ने शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी छापेमारी अभियान चलाया।
पुलिस के अनुसार, परीक्षा संचालन एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के तीन कर्मचारियों—हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार—को गिरफ्तार किया गया है। तीनों को विशेष अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या आठ हो गई है।
पांच आरोपियों की मिली रिमांड
CID को मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों से पूछताछ के लिए पांच दिन की रिमांड मिली है। इनमें जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, निदेशक रामवीर सिंह तथा उस्मान और एबाद शामिल हैं।
नोट: वर्ष 2008 की लेक्चरर नियुक्ति से जुड़े आरोप तत्कालीन सचिव के शपथ पत्र और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सामने आए हैं। मामले की जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
