नई दिल्ली | Gyanesh Kumar: देश की सियासत में ‘अविश्वास’ का दौर गहराता जा रहा है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद अब विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए मोर्चा खोल दिया है। सूत्रों के अनुसार, इस ऐतिहासिक कदम के लिए 200 से अधिक सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।
सांसदों का गणित: जरूरी संख्या से कहीं अधिक समर्थन
मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को हटाने की प्रक्रिया के लिए नियमों के अनुसार एक निश्चित संख्या में सांसदों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं, जिसे विपक्ष ने आसानी से पार कर लिया है:
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लोकसभा: 130 सांसदों ने हस्ताक्षर किए (न्यूनतम आवश्यकता: 100)।
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राज्यसभा: 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए (न्यूनतम आवश्यकता: 50)।
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कुल हस्ताक्षर: 193 से अधिक (सूत्रों के अनुसार संख्या 200 के पार पहुंच चुकी है)।
यह नोटिस शुक्रवार को संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
नोटिस में लगाए गए 7 गंभीर आरोप
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ एक चार्जशीट तैयार की है, जिसमें “सत्तारूढ़ भाजपा की मदद करने” के आरोपों को प्रमुखता दी गई है। मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
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पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण करना।
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चुनावी धोखाधड़ी की जांच में जानबूझकर बाधा डालना।
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बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना।
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मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (SIR) में केंद्र सरकार को लाभ पहुंचाना।
विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
विपक्षी एकता का शक्ति प्रदर्शन
इस नोटिस पर न केवल ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी दलों ने हस्ताक्षर किए हैं, बल्कि आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसदों ने भी अपना समर्थन दिया है। यह पहली बार है जब भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए इस स्तर पर पहल की गई है।
क्या है हटाने की प्रक्रिया (महाभियोग)?
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना कोई आसान प्रक्रिया नहीं है। इन्हें केवल उसी विधि से हटाया जा सकता है जिससे सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है:
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आधार: सिद्ध कदाचार या अक्षमता।
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पारित होने की शर्त: इसे संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होना चाहिए। यानी सदन की कुल संख्या का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत।
संसद का मौजूदा सत्र काफी हंगामेदार होने वाला है। एक ओर स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और दूसरी ओर चुनाव आयोग पर विपक्ष का यह कड़ा प्रहार सरकार और विपक्ष के बीच की खाई को और चौड़ा कर रहा है। अब सबकी नजरें शुक्रवार को संसद की कार्यवाही पर टिकी हैं।
