7 साल बाद बहाल हुआ बर्खास्त इंजीनियर | हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार का बड़ा फैसला

7 साल पहले बर्खास्त इंजीनियर सुशील कुमार फिर हुए बहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार का बड़ा फैसला


झारखंड सरकार का बड़ा फैसला: 7 साल पहले बर्खास्त किए गए इंजीनियर सुशील कुमार फिर हुए बहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई

Ranchi: झारखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए सात वर्ष पहले सेवा से बर्खास्त किए गए पथ निर्माण विभाग के सहायक अभियंता सुशील कुमार को पुनः सेवा में बहाल कर दिया है। इस संबंध में राज्य सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश और राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद विभाग ने बहाली की प्रक्रिया पूरी की।

हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 में जारी बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए कहा था कि विभागीय कार्रवाई में कई प्रक्रियागत त्रुटियां थीं। इसके बाद सरकार ने अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए सुशील कुमार को सेवा में बहाल मानते हुए सभी पेंशन एवं सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्णय लिया है।

क्या था पूरा मामला?

मामला वर्ष 2006-07 का है, जब सुशील कुमार ग्रामीण कार्य विभाग के लोहरदगा कार्य प्रमंडल में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत थे। उन पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत फतेहपुर-टियमु सड़क निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं कराने का आरोप लगाया गया था।

इसके अलावा उन पर ठेकेदार प्रदीप कुमार उपाध्याय के साथ मिलकर लगभग 1.26 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता और वास्तविक कार्य से अधिक भुगतान दर्शाने का गंभीर आरोप भी लगा था।

बाद में रांची नगर निगम में पदस्थापन के दौरान वर्ष 2013 में एक भवन मानचित्र (G+4) स्वीकृत करने के बदले रिश्वत मांगने और आवेदन निरस्त करने की कोशिश का आरोप भी सामने आया था। इन मामलों को लेकर निगरानी थाना में कांड संख्या 50/2010 दर्ज किया गया था। इस मामले में सुशील कुमार 16 जून 2015 से 20 नवंबर 2015 तक न्यायिक हिरासत में भी रहे थे।

2019 में हुई थी बर्खास्तगी

वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीर मानते हुए झारखंड सरकार ने झारखंड सरकारी सेवक नियमावली-2016 के तहत 8 मार्च 2019 को अधिसूचना जारी कर सुशील कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।

गौरतलब है कि वे 31 मई 2019 को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन सेवानिवृत्ति से ठीक पहले उन्हें सेवा से हटाने का आदेश जारी किया गया था।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया बर्खास्तगी आदेश?

सुशील कुमार ने अपनी बर्खास्तगी को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2024 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

अदालत ने कहा कि विभागीय जांच के दौरान न तो कोई मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किया गया और न ही प्रमुख दस्तावेजों के लेखकों से पूछताछ की गई। कोर्ट ने पाया कि केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर इतनी बड़ी सजा देना न्यायसंगत नहीं था।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 के बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया और सुशील कुमार को सेवा में बहाल मानते हुए सभी पेंशन संबंधी एवं परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया।

सरकार ने जारी की बहाली अधिसूचना

हाईकोर्ट के आदेश और मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद झारखंड सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सुशील कुमार की बहाली को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उन्हें सेवानिवृत्ति लाभ, पेंशन और अन्य वैधानिक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

यह फैसला राज्य के प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद अदालत ने प्रक्रियागत कमियों के आधार पर बर्खास्तगी आदेश को निरस्त किया है।

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