झारखंड राज्यसभा चुनाव: 2 सीटें, 3 उम्मीदवार और हॉर्स ट्रेडिंग का साया, विधायकों पर खुफिया विभाग की पैनी नजर
Ranchi: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब पूरी तरह राजनीतिक रोमांच और सियासी गणित का केंद्र बन गया है। दो सीटों पर तीन उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच सूत्रों के हवाले से खबर है कि राज्य का खुफिया विभाग विधायकों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ़ महागठबंधन की ओर से जेएमएम के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा मैदान में हैं, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
क्या है विधानसभा का गणित?
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता होती है।
महागठबंधन की स्थिति
- जेएमएम, कांग्रेस, राजद और सहयोगी दलों के पास कुल 56 विधायक
- दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल
एनडीए की स्थिति
- भाजपा, आजसू, जदयू और अन्य सहयोगियों के कुल 24 विधायक
- जीत के लिए अभी भी 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत
यही चार वोट पूरे चुनाव का सबसे बड़ा सस्पेंस बने हुए हैं।
खुफिया विभाग क्यों हुआ अलर्ट?
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने संभावित खरीद-फरोख्त और राजनीतिक सेंधमारी की आशंकाओं को देखते हुए खुफिया विभाग को विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।
खुफिया एजेंसियां निम्न बिंदुओं पर नजर रख रही हैं:
- विधायकों की गतिविधियां और संपर्क
- प्रमुख होटलों, रिसॉर्ट्स और फार्महाउस में होने वाली बैठकों की जानकारी
- संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और फंडिंग नेटवर्क
- नाराज या असंतुष्ट विधायकों की राजनीतिक गतिविधियां
- चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल और संपर्क सूत्र
झारखंड का राज्यसभा चुनाव और विवादों का इतिहास
झारखंड में राज्यसभा चुनाव पहले भी विवादों और कथित खरीद-फरोख्त के आरोपों के कारण सुर्खियों में रहा है।
2012 का चर्चित कैश कांड
राज्यसभा चुनाव के दौरान रांची में एक वाहन से करीब 2.15 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे। आरोप लगा था कि यह रकम विधायकों को प्रभावित करने के लिए लाई गई थी। मामला इतना गंभीर हुआ कि चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव को ही रद्द कर दिया था।
2010 का वोट के बदले नोट मामला
एक मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में कई विधायक कथित तौर पर वोट के बदले पैसे लेने की बातचीत करते दिखाई दिए थे। बाद में मामले की जांच सीबीआई तक पहुंची और कई स्थानों पर छापेमारी हुई थी।
18 जून पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजर 18 जून को होने वाले मतदान पर टिकी है। महागठबंधन अपने संख्या बल के आधार पर दोनों सीटें जीतने का दावा कर रहा है, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी चुनावी मुकाबले को रोचक बनाने में सफल रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ दो राज्यसभा सीटों का नहीं, बल्कि झारखंड विधानसभा के भीतर राजनीतिक एकजुटता और दलों की पकड़ की भी बड़ी परीक्षा है।
