झरिया विस्थापितों पर संकट: कागजों में सरकारी हुई जमीन, पुनर्वास अधर में

धनबाद में बड़ा गड़बड़झाला: म्यूटेशन फंसा, 2028 पुनर्वास लक्ष्य पर खतरा

धनबाद में जमीन का बड़ा गड़बड़झाला: 15 हजार परिवारों के पुनर्वास पर संकट

धनबाद | विशेष रिपोर्ट (शोभित रंजन)

झारखंड की कोयलानगरी Dhanbad से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने हजारों विस्थापित परिवारों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Belgarhia पुनर्वास परियोजना में जमीन से जुड़ी बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई है।

कोयला कंपनी Bharat Coking Coal Limited (बीसीसीएल) द्वारा अधिग्रहित करीब 378.39 एकड़ जमीन का बड़ा हिस्सा हालिया सर्वे में “गैर-आबाद” (सरकारी जमीन) दर्ज कर दिया गया है। इस विसंगति ने पूरे मामले को उलझा दिया है, जिससे म्यूटेशन प्रक्रिया ठप पड़ गई है और करीब 15 हजार परिवारों का पुनर्वास अधर में लटक गया है।


🔴 क्या है पूरा मामला?

बेलगड़िया परियोजना का उद्देश्य Jharia के अग्नि प्रभावित और अति खतरनाक इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाना था। इसके लिए बीसीसीएल ने वर्षों पहले रैयतों से जमीन अधिग्रहित की थी।

लेकिन हालिया सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ—


⚠️ कैसे फंसा पूरा मामला?

इस गड़बड़ी के पीछे कई कारण सामने आए हैं—

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ऐसे मामलों के समाधान को लेकर अब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किया गया है।


📊 पुनर्वास परियोजना की स्थिति

सरकार का लक्ष्य है कि 2028 तक 15 हजार से ज्यादा परिवारों का पुनर्वास पूरा किया जाए, लेकिन मौजूदा स्थिति इस लक्ष्य को खतरे में डाल रही है।


🏛️ मंत्रालय के पत्र से बढ़ा दबाव

24 मार्च 2026 को कोयला मंत्रालय ने धनबाद उपायुक्त को पत्र लिखकर म्यूटेशन प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा है।
स्पष्ट किया गया कि बिना म्यूटेशन के विस्थापितों को जमीन और घर का वैध अधिकार देना संभव नहीं है।


❗ जिम्मेदारी किसकी?

मामले में कई स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं—

अधिकारी भी इसे “जटिल प्रशासनिक और रिकॉर्ड की विसंगति” मान रहे हैं।


⚖️ अब क्या है रास्ता?

मौजूदा हालात में इस विवाद का समाधान अदालत के जरिए ही संभव दिख रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया लंबी जरूर होगी, लेकिन यही सबसे वैधानिक और स्थायी समाधान है

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