Jharkhand News: झारखंड में नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार, आज खत्म हो रही डेडलाइन

95% नक्सल मुक्त झारखंड, अब अंतिम गढ़ पर सुरक्षा बलों का वार

Jharkhand News: झारखंड में नक्सलवाद के खात्मे की तय समयसीमा आज समाप्त हो रही है, और इस बीच सुरक्षा एजेंसियों का अभियान अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य का लगभग 95 प्रतिशत इलाका नक्सल मुक्त हो चुका है, जबकि बचे हुए इलाकों में भी सुरक्षा बलों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

खुफिया एजेंसी (आईबी) के इनपुट के मुताबिक, शीर्ष नक्सली अब लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं और सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में हैं। एक करोड़ के इनामी नक्सली असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर के छिपे होने की जानकारी मिली है। 63 वर्षीय असीम मंडल, जो पोलित ब्यूरो का सदस्य है और गिरिडीह का निवासी बताया जाता है, अपने करीब 40 साथियों के साथ सक्रिय है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि वह जल्द ही सरेंडर कर सकता है।

सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई का असर नक्सली संगठन की सप्लाई चेन पर साफ दिख रहा है। नक्सलियों तक राशन और विस्फोटकों की आपूर्ति लगभग 90 प्रतिशत तक घट चुकी है, जिससे संगठन की गतिविधियां काफी कमजोर पड़ गई हैं।

ऑपरेशन मेगाबुरु और डबल बुल से टूटा नक्सलियों का गढ़: Jharkhand News

पिछले डेढ़ साल में सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल की है। 58 कुख्यात नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए हैं, जबकि 45 नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा का रास्ता अपनाया है। ‘ऑपरेशन मेगाबुरु’ और ‘ऑपरेशन डबल बुल’ के तहत उन इलाकों में भी घुसपैठ कर कार्रवाई की गई, जिन्हें कभी नक्सलियों का अभेद्य किला माना जाता था।

झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक अब राज्य में सिर्फ 38 नक्सली ही सक्रिय बचे हैं, जिनमें दो पर एक-एक करोड़ रुपये का इनाम है। आईजी अभियान माइकल राज ने बताया कि अब नक्सलियों की सीमित मौजूदगी केवल पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल क्षेत्र में रह गई है, जहां संयुक्त सुरक्षा बल लगातार ऑपरेशन चला रहे हैं।

इनामी नक्सलियों का ब्योरा: Jharkhand News

15 महीने में बड़ी उपलब्धि: Jharkhand News

जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच मारे गए 58 नक्सलियों में 2025 के 41 और 2026 में अब तक 17 शामिल हैं। 22 जनवरी 2026 को पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में पोलित ब्यूरो सदस्य पतिराम मांझी उर्फ अनल दा के मारे जाने से नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका लगा। उस पर कुल 2.35 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

इसके अलावा बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के सदस्य अनमोल उर्फ सुशांत, जिस पर 90 लाख का इनाम था, वह भी मुठभेड़ में मारा गया।

नक्सल क्षेत्रों की बदलती तस्वीर

झारखंड के कई ऐसे इलाके, जो कभी नक्सलियों के गढ़ माने जाते थे, अब पूरी तरह बदल चुके हैं-

सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि अब नक्सलियों की नई भर्ती लगभग शून्य पर आ गई है और संगठन की रीढ़ मानी जाने वाली सप्लाई चेन भी लगभग ध्वस्त हो चुकी हैI

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