NEET UG री-एग्जाम में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, गिरिडीह की छात्रा गिरफ्तार, झारखंड से जुड़े तार
Ranchi: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 री-एग्जाम में एक बार फिर सॉल्वर गैंग की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। बिहार के लखीसराय में परीक्षा के दौरान पकड़े गए हाईटेक सॉल्वर नेटवर्क के तार अब झारखंड से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार 24 आरोपियों में झारखंड के गिरिडीह जिले की रहने वाली एक छात्रा को भी शामिल पाया है।
गिरफ्तार छात्रा पूनम कुमारी पर आरोप है कि वह मोटी रकम के बदले किसी अन्य अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने पहुंची थी। जांच एजेंसियों के अनुसार वह ‘डमी कैंडिडेट’ बनकर परीक्षा दे रही थी।
BHU की छात्रा निकली आरोपी
जानकारी के अनुसार पूनम कुमारी गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड के बरहमसिया गांव की रहने वाली है। वह वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में बीएससी नर्सिंग की छात्रा है।
पुलिस का दावा है कि परीक्षा केंद्र पर दस्तावेजों और पहचान सत्यापन के दौरान गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच में सॉल्वर नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिलने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
डॉक्टर बनने का सपना, फिर सॉल्वर गैंग तक पहुंची छात्रा
परिजनों के मुताबिक पूनम पढ़ाई में काफी अच्छी थी और उसने वर्ष 2022 में इंटरमीडिएट परीक्षा अच्छे अंकों से पास की थी। उसका सपना डॉक्टर बनने का था और उसने कई बार NEET परीक्षा दी थी।
हालांकि अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद उसने वर्ष 2025 में BHU में बीएससी नर्सिंग कोर्स में दाखिला लिया। परिवार का कहना है कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि पूनम इस तरह के किसी नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।
लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों पर कार्रवाई
21 जून 2026 को बिहार के लखीसराय जिले में NEET UG री-एग्जाम आयोजित किया गया था। परीक्षा के दौरान प्रशासन को सूचना मिली कि कुछ केंद्रों पर असली अभ्यर्थियों की जगह डमी उम्मीदवार परीक्षा दे रहे हैं।
इसके बाद प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने जिले के तीन प्रमुख परीक्षा केंद्रों—
- आरके कॉलेज
- केंद्रीय विद्यालय
- उच्च विद्यालय, हसनपुर
में छापेमारी की।
कार्रवाई के दौरान कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें कथित सॉल्वर, अभ्यर्थी और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
पूरे रैकेट की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब इस नेटवर्क के मुख्य सरगना, आर्थिक लेन-देन और विभिन्न राज्यों में फैले इसके कनेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह है, जो मेडिकल और प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जी उम्मीदवार बैठाने का काम करता है।
जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं।
