झारखंड विधानसभा मानसून सत्र शुरू: हेमलाल मुर्मू, सीपी सिंह समेत 5 विधायक सभापति मनोनीत, कार्यमंत्रणा समिति का भी गठन
Ranchi: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का गुरुवार से औपचारिक आगाज हो गया। सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने सदन के संचालन के लिए पांच विधायकों को सभापति (Panel of Chairpersons) के रूप में मनोनीत किया। साथ ही कार्यमंत्रणा समिति (Business Advisory Committee) के गठन की भी घोषणा की गई, जो सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही और एजेंडे के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इन विधायकों को बनाया गया सभापति
स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने मानसून सत्र के लिए जिन पांच विधायकों को सभापति के रूप में नामित किया है, उनमें शामिल हैं—
- हेमलाल मुर्मू
- सीपी सिंह
- निरल पूर्ति
- रामचंद्र सिंह
- नीरा यादव
सदन की कार्यवाही के दौरान आवश्यकता पड़ने पर ये सदस्य सभापति के रूप में अध्यक्षीय जिम्मेदारी निभाएंगे।
कार्यमंत्रणा समिति का गठन
विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यमंत्रणा समिति के गठन की भी घोषणा की।
समिति के अध्यक्ष:
- रवींद्रनाथ महतो (विधानसभा अध्यक्ष)
सदस्य:
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
- राधाकृष्ण किशोर
- बाबूलाल मरांडी
- प्रदीप यादव
- निरल पूर्ति
- अरूप चटर्जी
विशेष आमंत्रित सदस्य
कार्यवाही के सुचारू संचालन और विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श के लिए कई विधायकों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से—
- दीपक बिरुआ
- सीपी सिंह
- मथुरा महतो
- नवीन जायसवाल
- निर्मल महतो
- जयराम महतो
- स्टीफन मरांडी
- सरयू राय
- सुरेश पासवान
- जनार्दन पासवान
- बसंत सोरेन
- नीरा यादव
- कल्पना सोरेन
शामिल हैं।
स्पीकर बोले- जनहित सर्वोपरि
सत्र की शुरुआत में विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि पांच दिवसीय मानसून सत्र के दौरान राज्य के विकास और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के सहयोग से यह सत्र सार्थक और जनकल्याणकारी साबित होगा।
अनुपूरक बजट और प्रश्नकाल पर रहेगी नजर
मानसून सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट भी सदन में पेश किया जाएगा। इसके अलावा चार कार्यदिवस प्रश्नकाल के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिनमें विधायक विभिन्न विभागों से जुड़े जनहित के मुद्दों को उठाएंगे।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह सत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि JPSC-JSSC भर्ती विवाद, छात्र आंदोलन, कानून-व्यवस्था, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
