बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को Nitish Kumar राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। उन्हें उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिनमें Nirmala Sitharaman, J. P. Nadda और Arjun Ram Meghwal शामिल थे।
शपथ ग्रहण के दौरान एक हल्का-फुल्का पल भी देखने को मिला, जब जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने उन्हें साइन करने के लिए पेन दिया। साइन करने के बाद नीतीश ने कहा “हो गया… चलें…”, जिस पर उन्हें फोटो सेशन के लिए रुकने को कहा गया।
चारों सदनों का सफर पूरा करने वाले नेता: Nitish Kumar
नीतीश कुमार अब देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने संसद और विधानमंडल के चारों सदनों लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद की सदस्यता हासिल की है। यह उनका पहला राज्यसभा कार्यकाल है।
फैसले पर कार्यकर्ताओं का विरोध: Nitish Kumar
शपथ लेने के बाद जब नीतीश कुमार पार्टी कार्यकर्ताओं से मिले, तो माहौल अचानक भावुक और तनावपूर्ण हो गया। कई कार्यकर्ताओं ने उनके सामने ही फैसले का विरोध जताया। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा “आपका फैसला गलत है… निशांत को सीएम बनाइए, या संजय झा को, या Lalan Singh को… लेकिन किसी और को स्वीकार नहीं करेंगे।” इस दौरान कार्यकर्ताओं की भावनाएं साफ तौर पर सामने आईं, जिससे पार्टी के अंदर चल रही हलचल का अंदाजा लगाया जा सकता है।
दिल्ली में नेताओं की मुलाकातों का दौर: Nitish Kumar
शपथ से पहले और बाद में दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज रही। जेडीयू और एनडीए के कई नेताओं ने नीतीश कुमार से मुलाकात की। इनमें Ramnath Thakur, Samrat Choudhary, अशोक चौधरी और मदन सहनी शामिल रहे। वहीं, केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा “बिहार आपको मिस करेगा।” दूसरी ओर राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने तंज कसते हुए कहा कि “आज से बिहार में उनकी सेवा समाप्त हो गई।”
बिहार में जल्द नई सरकार के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 13 अप्रैल को कैबिनेट की अंतिम बैठक और 14 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लग सकती है। दिल्ली पहुंचने पर नीतीश कुमार ने खुद संकेत दिया था “अब यहीं रहूंगा… पहले भी लंबे समय तक दिल्ली में काम किया है, अब फिर से सक्रिय रहूंगा।”
आगे क्या?
नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है। जहां एक तरफ सत्ता परिवर्तन की चर्चा तेज है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर असंतोष भी खुलकर सामने आ रहा है। अब सबकी नजर 14 अप्रैल पर टिकी है, जब बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है।
