काठमांडू: Nepal की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। गृहमंत्री Sudan Gurung ने पद संभालने के महज 26 दिनों के भीतर इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा प्रधानमंत्री Balen Shah के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कौन हैं सुदन गुरुंग?: Nepal
सुदन गुरुंग का नाम नेपाल की राजनीति में तेजी से उभरा।
- गैर-राजनीतिक परिवार से आते हैं
- Gen-Z आंदोलन के दौरान लोकप्रियता मिली
- “हामी नेपाल” संगठन से जुड़े
- आक्रामक भाषण शैली से युवाओं में तेजी से लोकप्रिय
उन्होंने Rastriya Swatantra Party के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद में एंट्री की और सीधे गृहमंत्री जैसे अहम पद तक पहुंचे।
इस्तीफे की सबसे बड़ी वजहें: Nepal
1. बड़े नेताओं की गिरफ्तारी का आदेश
गृह मंत्री बनते ही गुरुंग ने पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli समेत कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के आदेश दिए।
- फैसले को जल्दबाजी और राजनीतिक कदम बताया गया
- देशभर में विवाद खड़ा हो गया
2. न्यायपालिका से टकराव
जब अदालत ने कुछ आरोपियों को राहत दी, तो गुरुंग ने सार्वजनिक रूप से न्यायपालिका पर टिप्पणी की।
- इससे संवैधानिक टकराव की स्थिति बनी
- उनके बयान को गैर-जिम्मेदाराना माना गया
3. संपत्ति और बयान पर विवाद
- संपत्ति में जमीन, सोना-चांदी का बड़ा खुलासा
- सोशल मीडिया पर विवादित बयान
- “गरीब पैदा होना गलती नहीं…” वाले बयान पर आलोचना
4. कारोबारी संबंधों पर सवाल
- मनी लॉन्ड्रिंग आरोपी दीपक भट्ट से संबंध
- उनकी कंपनी में निवेश
- पैसों के स्रोत पर स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए
क्या था पूरा मामला?: Nepal
गुरुंग ने गृहमंत्री बनने के बाद हाई-प्रोफाइल कार्रवाई शुरू की
- कई नेताओं और कारोबारियों की गिरफ्तारी
- सोशल मीडिया पर ‘काउंटडाउन’ जैसे पोस्ट
- कानून व्यवस्था पर आक्रामक स्टैंड
लेकिन यही तेजी उनके लिए मुश्किल बन गई।
बालेन शाह के लिए कितना बड़ा झटका?
प्रधानमंत्री Balen Shah के लिए यह इस्तीफा कई मायनों में अहम है:
- कैबिनेट के प्रमुख और भरोसेमंद चेहरा थे गुरुंग
- भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा कमजोर पड़ सकता है
- नई सरकार की स्थिरता पर सवाल उठे
गुरुंग और बालेन शाह दोनों इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं और लंबे समय से साथ काम कर चुके हैं, ऐसे में यह राजनीतिक और व्यक्तिगत दोनों स्तर पर बड़ा झटका माना जा रहा है। सुदन गुरुंग का तेज़ उभार और उतनी ही तेज़ गिरावट यह दिखाती है कि नई राजनीति में लोकप्रियता के साथ-साथ संतुलन और संस्थाओं के प्रति संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है।
