बिहार विधान परिषद उपचुनाव: 12 मई को वोटिंग, ‘9 सीट फॉर्मूला’ से तय होगा खेल

MLC उपचुनाव का ऐलान: कुशवाहा के बेटे की एंट्री तय, NDA को बढ़त के संकेत

बिहार विधान परिषद उपचुनाव: 12 मई को वोटिंग, सीट बंटवारे और ‘9 सीट फॉर्मूला’ से बदलेगा सियासी गणित

पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विधान परिषद की दो सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के साथ ही सियासी समीकरण नए सिरे से बनने लगे हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, दोनों सीटों पर 12 मई को मतदान होगा और उसी दिन नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे।

यह उपचुनाव उन सीटों पर हो रहा है जो नेताओं के विधायक बनने या इस्तीफे के कारण खाली हुई हैं। मंगल पांडेय के विधायक बनने के बाद उनकी सीट खाली हुई, जबकि राधा चरण शाह के विधानसभा जाने से भोजपुर-बक्सर क्षेत्र की सीट रिक्त हुई थी।

कुशवाहा के बेटे का रास्ता साफ

राजनीतिक समझौते के तहत उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का विधान परिषद पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव के दौरान इस सीट को लेकर भाजपा की ओर से आश्वासन दिया गया था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है।

भोजपुर-बक्सर में दिलचस्प मुकाबला

भोजपुर-बक्सर स्थानीय प्राधिकार सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

इस सीट पर खास बात यह है कि मुकाबला दो पूर्व एमएलसी के बेटों के बीच है, जिससे चुनाव और भी रोचक हो गया है।

12 सीटें खाली, ‘9 सीट फॉर्मूला’ से तय होगा खेल

28 जून 2026 को विधान परिषद की 9 सीटें खाली हो रही हैं, जबकि 2 सीटें पहले से रिक्त हैं। इसके अलावा 3 सीटों पर उपचुनाव होना है। यानी कुल मिलाकर 12 सीटों पर सियासी गणित सेट होगा।

इस पूरे समीकरण में जदयू, भाजपा, राजद और अन्य दलों के बीच सीटों का बंटवारा अहम रहेगा।

क्या है जीत का गणित?

विधान परिषद चुनाव में जीत का फॉर्मूला है:
कुल विधायक ÷ कुल सीटें + 1

243 विधायकों के हिसाब से एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 25 वोट चाहिए। इस गणित के आधार पर एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है।

NDA को बढ़त, महागठबंधन दबाव में

संख्याबल के आधार पर एनडीए को इस चुनाव में फायदा मिलता दिख रहा है।

नए चेहरों को मिल सकता है मौका

इस बार सभी दल नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में हैं। युवा नेताओं की एंट्री के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बदलाव दिख सकता है।

LJP(R) भी खेल में

चिराग पासवान की पार्टी LJP (रामविलास) भी इस बार विधान परिषद में अपना खाता खोलने की कोशिश में है। पार्टी ने एनडीए को समर्थन दिया है और एक सीट की मांग कर रही है।

बदलेंगे सियासी समीकरण

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपचुनाव और आगामी सीटों के बंटवारे से बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनेंगे। खासकर जदयू और भाजपा के बीच संतुलन, सहयोगी दलों की भूमिका और नए नेताओं की एंट्री आने वाले समय की राजनीति तय करेगी।

Exit mobile version