Jharkhand News: झारखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख दल कांग्रेस के भीतर की अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ गई है। वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने प्रदेश प्रभारी के. राजू को एक के बाद एक कई पत्र लिखकर संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर “दोहरे मापदंड” और “स्थानीय मुद्दों पर चुप्पी” को लेकर प्रदेश नेतृत्व की जमकर घेरेबंदी की है।
“एक आँख में सुरमा और दूसरे में काजल”: Jharkhand News
राधा कृष्ण किशोर ने पार्टी के अनुशासनात्मक फैसलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि संगठन में दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि बड़कागांव के कद्दावर नेता योगेंद्र साव को आखिर किस कसूर में तीन साल के लिए निष्कासित किया गया, जबकि पार्टी को सार्वजनिक रूप से कोसने वाली रमा खलखो को चुनाव प्रबंध समिति में महत्वपूर्ण जगह दी गई। उन्होंने इसे पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने वाला फैसला बताया।
जंबो कमेटी पर तंज: 314 या 628, संख्या से क्या फर्क पड़ता है?: Jharkhand News
प्रदेश कांग्रेस द्वारा हाल ही में घोषित 314 सदस्यों की भारी-भरकम ‘जंबो कमेटी’ पर तंज कसते हुए किशोर ने कहा कि यदि पार्टी स्थानीय मुद्दों पर मौन रही, तो सदस्यों की संख्या दोगुनी (628) करने से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने नेतृत्व को सलाह दी कि ‘जंबो-जेट समिति’ बनाने के बजाय संगठन की मजबूती के लिए कड़े फैसले लेने की जरूरत है।
8 ज्वलंत मुद्दे, जिन पर प्रदेश नेतृत्व को घेरा: Jharkhand News
अपने पत्र में राधा कृष्ण किशोर ने 8 प्रमुख बिंदुओं के जरिए कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रखा है:
- भाषा विवाद: पलामू, गढ़वा, चतरा और गोड्डा जैसे जिलों में बोली जाने वाली मगही और भोजपुरी को JTET से हटाने पर प्रदेश नेतृत्व की चुप्पी
- महिला आरक्षण: राहुल गांधी के महिला आरक्षण के तर्कों को झारखंड की महिलाओं तक पहुँचाने में संगठन की विफलता
- SC समाज की अनदेखी: 50 लाख की आबादी वाले अनुसूचित जाति समाज के लिए SC परामर्शदात्री परिषद को पुनर्जीवित करने की मांग पर मौन
- कानून व्यवस्था: हजारीबाग के विष्णुगढ़ में नाबालिग के साथ अपराध और तीन अल्पसंख्यकों की हत्या के मामलों में प्रदेश नेतृत्व की सुस्ती
- सामाजिक न्याय: 314 सदस्यों की कमेटी में दलित, पिछड़ों और आदिवासियों की वास्तविक भागीदारी पर सवाल
“पार्टी विरोधी नहीं, पार्टी हित की बात”
राधा कृष्ण किशोर ने पत्र के अंत में स्पष्ट किया कि जनता के मुद्दों को उठाना ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधि नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी को ऐसा लगता है, तो वे किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। अंत में उन्होंने एक सधा हुआ संदेश देते हुए कहा “एक को साधिए, झारखंड कांग्रेस में सब सध जाएगा।”
झारखंड कांग्रेस के भीतर उठी यह बगावत सिर्फ एक नेता की नाराजगी नहीं, बल्कि संगठन के अंदर गहराते असंतोष का संकेत है।
चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाजी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।
