दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि: नेमरा में CM हेमंत सोरेन ने किया 14 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण, विकास मेले का भी आयोजन

नेमरा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि, CM हेमंत सोरेन ने किया आदमकद प्रतिमा का अनावरण

दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि: नेमरा में CM हेमंत सोरेन ने किया 14 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण, श्रद्धांजलि सभा व विकास मेले का आयोजन

Ramgarh: झारखंड आंदोलन के प्रणेता, दिशोम गुरु और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) में भव्य श्रद्धांजलि सभा, विकास मेला और परिसंपत्ति वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लुकैयाटांड़ स्थित सोना सोबरन प्लस टू विद्यालय परिसर में स्थापित दिशोम गुरु की 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में समर्थक, ग्रामीण और झारखंड आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हुए।

श्रद्धांजलि देकर किया नमन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिमा अनावरण के बाद दिशोम गुरु के चित्र एवं प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वे पैतृक आवास पहुंचे, जहां सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उन्होंने शहीद सोबरन मांझी की प्रतिमा पर भी माल्यार्पण कर नमन किया।

कई मंत्री और विधायक रहे मौजूद

कार्यक्रम में गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ राज्य सरकार के कई मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडे सिंह, कृषि मंत्री शिल्पा नेहा तिर्की, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मंत्री योगेंद्र महतो, संजय यादव, विधायक अनूप सिंह, ममता देवी, अमित महतो, उमाकांत रजक समेत कई अन्य जनप्रतिनिधियों ने दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की।

विकास मेला और परिसंपत्ति वितरण

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ आयोजित विकास मेले में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए। इस दौरान सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई और पात्र लाभुकों के बीच विभिन्न योजनाओं के तहत परिसंपत्तियों एवं लाभों का वितरण किया गया।

संघर्ष और विरासत को किया याद

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन जल, जंगल और जमीन की रक्षा, आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित किया। उनके संघर्षों की बदौलत झारखंड आंदोलन को नई दिशा मिली और अलग राज्य के सपने को साकार करने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।

उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु की विचारधारा, संघर्ष और सामाजिक न्याय का संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उनकी विरासत को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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