Jharkhand News: झारखंड के रामगढ़ जिले में अवैध कोयला कारोबार पर प्रशासन की सख्ती के बाद अब माफिया ने अपना तरीका बदल लिया है। पहले जहां रात के अंधेरे में ट्रकों के जरिए बड़े पैमाने पर कोयले की तस्करी होती थी, वहीं अब बॉर्डर सील और सख्त जांच के कारण यह नेटवर्क नई रणनीति के साथ काम कर रहा है।
बिहार की ओर जाने वाले सभी प्रमुख एंट्री प्वाइंट्स पर कड़ी नाकेबंदी कर दी गई है। चौक-चौराहों से लेकर सीमावर्ती इलाकों तक पुलिस हर वाहन की गहन जांच कर रही है। संदिग्ध ट्रकों को जब्त किया जा रहा है और चालकों से पूछताछ भी जारी है। इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर लगातार छापेमारी हो रही है, जिससे अवैध कारोबारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
अब अंडरलोडिंग का खेल: Jharkhand News
सख्ती बढ़ने के बाद माफिया ने अब “अंडरलोडिंग” का तरीका अपनाना शुरू कर दिया है। ट्रकों में कम मात्रा में कोयला लोड कर कागजात में उसे वैध दिखाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही छोटे-छोटे खेप में ज्यादा ट्रिप कर पुलिस की नजर से बचने की रणनीति बनाई गई है।
इंट्री रेट घटाकर नेटवर्क फिर सक्रिय: Jharkhand News
सूत्रों के मुताबिक, अब इंट्री रेट में भी कटौती कर दी गई है ताकि नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो सके। “कम जोखिम और कम मुनाफा, लेकिन लगातार सप्लाई” के फॉर्मूले पर काम किया जा रहा है।
बॉर्डर सील, कई ट्रक फंसे: Jharkhand News
बॉर्डर सील होने के कारण कई ट्रक रास्ते में ही फंस गए हैं। लोडिंग प्वाइंट्स पर भी गतिविधियां धीमी हो गई हैं। हालांकि, इतना तय है कि नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब यह रूट और टाइमिंग बदलकर फिर से सक्रिय होने की कोशिश में है।
बड़े सवाल खड़े: Jharkhand News
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि GST, DTO, DFO और DMO जैसे जिम्मेदार अधिकारी आखिर कहां हैं? सख्ती के बीच इन विभागों की भूमिका और निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रामगढ़ में अवैध कोयला कारोबार पर लगाम कसने की कोशिश जारी है, लेकिन माफिया के बदलते तरीके प्रशासन के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सख्ती इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म कर पाती है या नहीं।
