Jharkhand News: झारखंड की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर चल रही बयानबाजी और अंदरूनी खींचतान चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। पश्चिम बंगाल और असम में कांग्रेस की हार के बाद अब उसका असर झारखंड कांग्रेस में भी दिखाई देने लगा है। पार्टी के अंदर जारी विवाद ने अब गठबंधन सरकार की स्थिरता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल 4 मई को चुनावी नतीजों के बाद झारखंड कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि विपक्ष के बजाय खुद सरकार में शामिल एक मंत्री लगातार अपनी ही पार्टी और संगठन के खिलाफ सोशल मीडिया पर पत्र लिखकर हमला बोल रहे हैं। इसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या झारखंड कांग्रेस के अंदर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा और क्या पार्टी गुटबाजी की ओर बढ़ रही है।
‘जंबो जेट संगठन’ टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद: Jharkhand News
पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कांग्रेस संगठन के विस्तार के बाद नए पदाधिकारियों की लंबी सूची जारी की गई। इस पर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने तंज कसते हुए इसे “जंबो जेट संगठन” बताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर बयान और पत्रों का दौर शुरू हो गया। राधाकृष्ण किशोर लगातार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश पर निशाना साधते रहे।
अनूप सिंह ने दिया जवाब: Jharkhand News
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब कांग्रेस विधायक अनूप सिंह खुलकर सामने आए। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस में होना और कांग्रेसी होना दोनों अलग बातें हैं। पार्टी की गाइडलाइन से ऊपर कोई नहीं है। अगर किसी को शिकायत है तो उसे पार्टी फोरम में उठाना चाहिए, सोशल मीडिया पर नहीं।” इस बयान के बाद साफ हो गया कि मामला सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी के भीतर शक्ति प्रदर्शन की स्थिति बन चुकी है।
मंत्री के समर्थन में भी उतरे विधायक: Jharkhand News
विवाद बढ़ने के साथ ही कुछ विधायक मंत्री राधाकृष्ण किशोर के समर्थन में भी सामने आए। ममता देवी और श्वेता सिंह ने कहा कि अगर पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता लगातार सवाल उठा रहा है तो कहीं न कहीं संगठन के भीतर समस्या जरूर है। वहीं दूसरी ओर सुरेश बैठा, निशात आलम और नमन विक्सल कोंगाड़ी जैसे नेताओं ने मंत्री के बयान को गलत बताते हुए पार्टी आलाकमान पर सार्वजनिक टिप्पणी को अनुशासनहीनता बताया।
बड़े नेताओं की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी को लेकर हो रही है। इरफान अंसारी, प्रदीप यादव और रामेश्वर उरांव जैसे बड़े नेताओं ने अब तक खुलकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसके अलावा झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू की चुप्पी को भी राजनीतिक गलियारों में कई संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
JMM की एंट्री से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
अब इस विवाद में JMM की भी एंट्री हो चुकी है। पार्टी के प्रधान महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अगर कोई समस्या है तो उसे कैबिनेट के भीतर उठाया जाना चाहिए, सार्वजनिक मंच पर नहीं।
इसके बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस और JMM के बीच अंदरखाने दूरी बढ़ रही है? क्या आने वाले समय में गठबंधन की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है?
कई सवालों के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
फिलहाल झारखंड की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस इस अंदरूनी विवाद को संभाल पाएगी? क्या मंत्री राधाकृष्ण किशोर की कुर्सी सुरक्षित रहेगी? और सबसे अहम, क्या JMM-कांग्रेस गठबंधन सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी या आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिलेंगे।
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