Jharkhand News: पश्चिमी सिंहभूम के Noamundi और Barajamda इलाके में अवैध लौह अयस्क खनन का बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने की बात सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर इस अवैध कारोबार को ‘डोको’ नाम दिया गया है, जो एक तरह का कोड वर्ड बन चुका है। आरोप है कि बंद खदानों के साथ-साथ जंगल और रैयत जमीनों से भी बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है।
बंद माइंस में भी धड़ल्ले से खनन: Jharkhand News
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में 12 से ज्यादा आयरन ओर माइंस बंद हैं, लेकिन इसके बावजूद वहां से लगातार खनन जारी है। नोवामुंडी बस्ती, बालजोड़ी, मेरालगाड़ा, मुंडासाई, सोसोपी, टंकुत्रा, राइका और आसपास के इलाकों में दिन के उजाले में भी गतिविधियां देखी जा रही हैं।
रात में तेज होता है खेल: Jharkhand News
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही रात होती है, सिंडिकेट के रूप में सक्रिय माफिया बड़े पैमाने पर आयरन ओर की ढुलाई शुरू कर देते हैं। हाइवा और अन्य भारी वाहनों में लदा लौह अयस्क कई थाना क्षेत्रों से गुजरते हुए चाईबासा, सरायकेला-खरसावां होते हुए चांडिल तक पहुंचाया जाता है।
कांडेनाला बना स्टॉकिंग पॉइंट: Jharkhand News
इलाके का कांडेनाला (स्थानीय नाला) अवैध खनन के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां बड़े पैमाने पर आयरन का स्टॉक किया जा रहा है। आरोप है कि बड़ाजामदा क्षेत्र के कुछ क्रशर प्लांट और स्टोरेज साइट्स का इस्तेमाल अवैध खनन सामग्री के भंडारण और सप्लाई के लिए किया जा रहा है।
कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य सड़कों से खुलेआम अवैध खनिज लदे वाहन गुजरते हैं, इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। पूर्व मुख्यमंत्री Madhu Koda द्वारा कुछ महीने पहले कथित रूप से अवैध आयरन लदे वाहनों को पकड़कर पुलिस को सौंपे जाने के बावजूद FIR दर्ज न होने की बात भी चर्चा में है।
जांच और कार्रवाई की मांग
इन आरोपों को लेकर स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों की मांग है कि अवैध खनन और परिवहन की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। कुल मिलाकर, नोवामुंडी और बड़ाजामदा क्षेत्र में अवैध खनन का यह मामला न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
