Iran Crisis: मेजबान बनने की होड़ में पाकिस्तान, भारत में ‘मध्यस्थता’ को लेकर छिड़ा सियासी घमासान

इस्लामाबाद/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी ईरान-अमेरिका युद्ध को रोकने के लिए अब कूटनीतिक ‘चौधरी’ बनने की होड़ मच गई है। इस रेस में पाकिस्तान ने खुद को आगे करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच मेजबानी (Hosting) का प्रस्ताव रखा है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस बयान के बाद भारत में भी सियासत गरमा गई है और विपक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं।

Iran Crisis: पाकिस्तान की ‘जबरन’ मध्यस्थता की कोशिश?

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया (X) पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की है।

Iran Crisis: ट्रंप का ‘5 दिन’ वाला अल्टीमेटम और ईरान का पलटवार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बीच एक बड़ा बयान दिया है:

भारत में विपक्ष हमलावर: “हम पिछड़ क्यों गए?”

पाकिस्तान के मध्यस्थ के रूप में उभरने की खबरों ने भारत में राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा निशाना साधा है।

“युद्ध से ठीक पहले प्रधानमंत्री ने इजरायल की यात्रा की, जिससे भारत की तटस्थ छवि प्रभावित हुई। आज भारत को मध्यस्थ की भूमिका में होना चाहिए था, लेकिन खबरों में पाकिस्तान का नाम आ रहा है। यह हमारी कूटनीतिक उपेक्षा है।”

— जयराम रमेश, महासचिव, कांग्रेस

जहाँ पाकिस्तान इस संकट में खुद को ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश कर रहा है, वहीं भारत सरकार का रुख अब भी ‘संवाद और कूटनीति’ पर टिका है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान वास्तव में पाकिस्तान की जमीन पर अमेरिका से बात करने को राजी होता है या यह केवल इस्लामाबाद की एक तरफा कोशिश बनकर रह जाएगी।

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