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सड़क हादसे में मृत युवक की आय ₹3 हजार से बढ़ाकर ₹6 हजार मानी, मुआवजा ₹10.98 लाख

ट्यूशन पढ़ाने वाले युवक की आय ₹3 हजार नहीं ₹6 हजार मानी, हाईकोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा

सड़क हादसा मुआवजा मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला, मृत युवक की आय ₹6 हजार मानी; परिजनों को मिलेंगे ₹10.98 लाख

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले में अहम फैसला सुनाते हुए मृत युवक की अनुमानित मासिक आय को ₹3,000 से बढ़ाकर ₹6,000 कर दिया है। इसके साथ ही मृतक के परिजनों को मिलने वाला मुआवजा ₹7.07 लाख से बढ़कर ₹10.98 लाख हो गया है।

अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की आय का औपचारिक रिकॉर्ड या रसीद उपलब्ध नहीं होने मात्र से उसकी वास्तविक आय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुआवजा तय करते समय मृतक की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र आकलन जरूरी है।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक ने TATA AIG General Insurance Company Ltd. की ओर से दायर याचिका पर सुनाया। बीमा कंपनी ने बोकारो दावेदारी अधिकरण के 15 दिसंबर 2016 के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम और ट्यूशन करता था युवक

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मृतक की परिस्थितियों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण किया। अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि मृतक युवा था और पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम करने के अलावा ट्यूशन भी पढ़ाता था

अदालत ने माना कि अनौपचारिक रूप से ट्यूशन पढ़ाने वाले व्यक्ति से हर महीने की कमाई की रसीद या बाकायदा आय का लेखा-जोखा उपलब्ध होना जरूरी नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि मुआवजे का निर्धारण करते समय उपलब्ध साक्ष्यों के साथ मृतक की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

₹7.07 लाख से बढ़कर ₹10.98 लाख हुआ मुआवजा

बोकारो दावेदारी अधिकरण ने मृतक की मासिक आय ₹3,000 मानते हुए परिजनों के लिए ₹7.07 लाख का मुआवजा निर्धारित किया था।

बीमा कंपनी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, अदालत ने बीमा कंपनी की याचिका खारिज करते हुए मृतक की मासिक आय का आकलन दोगुना कर ₹6,000 कर दिया।

आय के इस संशोधित आकलन के आधार पर कुल मुआवजा बढ़ाकर ₹10.98 लाख कर दिया गया।

ब्याज दर को लेकर भी बीमा कंपनी को राहत नहीं

बीमा कंपनी ने मुआवजा भुगतान में देरी की स्थिति में लागू होने वाले ब्याज को भी चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी ब्याज दर को केवल ‘दंडात्मक’ कह देने से वह अपने आप अवैध नहीं हो जाती।

अदालत ने दावेदारी अधिकरण द्वारा निर्धारित 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और भुगतान में चूक की स्थिति में 11 प्रतिशत ब्याज की व्यवस्था को बरकरार रखा।

चार दावेदारों में बराबर बांटी जाएगी राशि

हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को आठ सप्ताह के भीतर बढ़ी हुई मुआवजा राशि संबंधित ट्रिब्यूनल में जमा करने का निर्देश दिया है।

पहले से दिए गए ₹50,000 और अदालत में जमा की गई वैधानिक राशि, यदि कोई हो, को कुल मुआवजे में समायोजित किया जाएगा।

अदालत के निर्देश के अनुसार बची हुई मुआवजा राशि चार दावेदारों के बीच बराबर-बराबर बांटी जाएगी।

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