
झारखंड बजट 2026-27: ₹1.42 लाख करोड़ में अब तक ₹33,897 करोड़ खर्च, महिला-बाल विकास विभाग टॉप पर
Ranchi: झारखंड के चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने कुल ₹1,42,019.37 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अब तक इसमें से ₹33,897.27 करोड़ का ही वास्तविक खर्च दर्ज किया गया है। यानी कुल बजट के मुकाबले वास्तविक व्यय करीब 24 फीसदी रहा है।
सरकार की ओर से विभिन्न स्तरों पर नियंत्रित पदाधिकारियों को ₹88,427.86 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी। इनमें से ₹62,677.27 करोड़ का आवंटन डीडीओ (DDO) को जारी किया गया, जबकि कोषागार से ₹57,192.98 करोड़ की निकासी हुई। हालांकि अंतिम स्तर पर वास्तविक खर्च ₹33,897.27 करोड़ ही दर्ज हुआ है।
महिला, बाल विकास विभाग सबसे आगे
विभागवार खर्च के आंकड़ों में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग सबसे आगे है। विभाग ने अब तक ₹8,434.76 करोड़ का वास्तविक खर्च किया है। विभाग का कुल बजट ₹20,248.15 करोड़ है।
इसके बाद ऊर्जा विभाग ने ₹4,249.79 करोड़ और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्राथमिक एवं वयस्क शिक्षा प्रभाग ने ₹3,481.42 करोड़ खर्च किए हैं।
वहीं, गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के गृह प्रभाग का वास्तविक खर्च ₹3,241.30 करोड़ रहा है।
पेंशन मद में वास्तविक खर्च शून्य
आंकड़ों में कुछ मदों में बजट और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर भी दिखाई देता है। पेंशन मद में ₹9,967.40 करोड़ का बजट प्रावधान है, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों में स्वीकृति, कोषागार निकासी और वास्तविक खर्च तीनों शून्य दर्ज हैं।
इसी तरह संसदीय कार्य प्रभाग में ₹2 करोड़ के बजट के मुकाबले वास्तविक खर्च ₹0.62 करोड़ और नगर विकास एवं आवास विभाग के आवास प्रभाग में ₹101.74 करोड़ के बजट के मुकाबले केवल ₹0.53 करोड़ का वास्तविक खर्च दर्ज किया गया है।
कृषि और ग्रामीण विकास में कितना खर्च?
कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के कृषि प्रभाग का बजट ₹2,106.36 करोड़ है। इसमें से ₹1,387.36 करोड़ की स्वीकृति और ₹884.11 करोड़ की कोषागार निकासी के बाद वास्तविक खर्च ₹155.85 करोड़ दर्ज हुआ है।
पशुपालन प्रभाग में ₹624.83 करोड़ के बजट के मुकाबले वास्तविक खर्च ₹63.86 करोड़ रहा।
वहीं, सहकारिता प्रभाग ने ₹962.15 करोड़ के बजट में से ₹483 करोड़ खर्च किए हैं।
ग्रामीण विकास विभाग का कुल बजट ₹8,978.87 करोड़ है। विभाग ने अब तक ₹1,057.34 करोड़ का वास्तविक खर्च किया है। वहीं ग्रामीण कार्य विभाग ने ₹4,156.74 करोड़ के बजट में से ₹1,960.86 करोड़ खर्च किए हैं।
सड़क और जल संसाधन विभाग की स्थिति
पथ निर्माण विभाग के लिए ₹6,301.32 करोड़ का बजट प्रावधान है। इसमें से वास्तविक खर्च ₹989.69 करोड़ रहा है।
जल संसाधन विभाग ने ₹2,132.24 करोड़ के बजट में से ₹790.17 करोड़ खर्च किए हैं। वहीं लघु सिंचाई प्रभाग में ₹392.89 करोड़ के बजट के मुकाबले ₹141.20 करोड़ का वास्तविक खर्च दर्ज हुआ है।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का बजट ₹3,996.35 करोड़ है, जबकि वास्तविक खर्च ₹163.90 करोड़ रहा।
ऊर्जा विभाग का वास्तविक खर्च ₹4,249 करोड़
ऊर्जा विभाग का कुल बजट ₹11,199.32 करोड़ है। विभाग को ₹5,047.50 करोड़ की स्वीकृति मिली और कोषागार से ₹4,376.99 करोड़ की निकासी हुई। इसके मुकाबले वास्तविक खर्च ₹4,249.79 करोड़ दर्ज किया गया है।
यह विभाग वास्तविक खर्च के मामले में राज्य के प्रमुख विभागों में शामिल है।
शिक्षा क्षेत्र में खर्च
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्राथमिक एवं वयस्क शिक्षा प्रभाग का बजट ₹10,000.50 करोड़ है। इसमें से ₹3,481.42 करोड़ का वास्तविक खर्च दर्ज हुआ है।
वहीं माध्यमिक शिक्षा प्रभाग का बजट ₹4,934.78 करोड़ है और वास्तविक खर्च ₹1,336.10 करोड़ रहा।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के उच्च शिक्षा प्रभाग में ₹1,949.81 करोड़ के बजट के मुकाबले ₹790.64 करोड़ खर्च हुए हैं। तकनीकी शिक्षा प्रभाग का वास्तविक खर्च ₹89.62 करोड़ दर्ज किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने ₹2,243 करोड़ खर्च किए
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग का बजट ₹6,164.57 करोड़ है। विभाग को ₹4,051.71 करोड़ की स्वीकृति और ₹3,313.52 करोड़ की कोषागार निकासी के बाद वास्तविक खर्च ₹2,243.29 करोड़ दर्ज हुआ है।
गृह विभाग में ₹3,241 करोड़ का वास्तविक व्यय
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के गृह प्रभाग का बजट ₹9,054.23 करोड़ है। इसमें से ₹8,320.23 करोड़ की स्वीकृति और ₹7,276.65 करोड़ की कोषागार निकासी के बाद वास्तविक खर्च ₹3,241.30 करोड़ दर्ज किया गया है।
वहीं आपदा प्रबंधन प्रभाग का बजट ₹1,296.26 करोड़ है, लेकिन वास्तविक खर्च ₹18.61 करोड़ रहा।
वित्तीय मदों में भी खर्च का अंतर
ब्याज भुगतान के लिए ₹6,671.96 करोड़ का बजट प्रावधान है। इसमें से वास्तविक खर्च ₹198.50 करोड़ दर्ज हुआ है।
ऋण पुनर्भुगतान के लिए ₹9,139.25 करोड़ का बजट है और वास्तविक खर्च ₹333.48 करोड़ रहा।
वित्त विभाग के ₹2,218.50 करोड़ के बजट के मुकाबले वास्तविक खर्च ₹153.87 करोड़ दर्ज किया गया है।
उद्योग, आईटी और पर्यटन विभाग का खर्च
उद्योग विभाग का बजट ₹501.30 करोड़ है, जबकि वास्तविक खर्च ₹61.68 करोड़ रहा।
सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग ने ₹395.51 करोड़ के बजट में से ₹38.06 करोड़ खर्च किए हैं।
पर्यटन प्रभाग में ₹206.90 करोड़ के बजट के मुकाबले ₹22.13 करोड़ का वास्तविक खर्च दर्ज हुआ है।
नगर विकास प्रभाग का बजट ₹2,385.86 करोड़ है, जिसमें से वास्तविक खर्च ₹205.97 करोड़ रहा।
बड़े बजट वाले विभागों में खर्च की स्थिति
उपलब्ध आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई विभागों में बजट के मुकाबले स्वीकृति और कोषागार से निकासी तो हुई है, लेकिन वास्तविक खर्च उससे काफी कम है। इसका मतलब है कि स्वीकृत राशि और निकासी के बाद भी पूरी राशि अंतिम स्तर पर खर्च नहीं हुई है।
वहीं महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा, ऊर्जा, गृह और स्कूली शिक्षा के कुछ प्रभागों में वास्तविक खर्च तुलनात्मक रूप से अधिक रहा है।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध विभागवार बजट, स्वीकृति, कोषागार निकासी और वास्तविक व्यय के आंकड़ों पर आधारित है।



