पटना | Tejashwi Yadav: बिहार में पिछले सप्ताह हुई बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इस संकट की घड़ी में नेता प्रतिपक्ष और राजद (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक औपचारिक पत्र लिखकर प्रभावित किसानों और मजदूरों के लिए तत्काल सहायता की मांग की है।
तेजस्वी ने जोर देकर कहा है कि जब किसान दाने-दाने को मोहताज है, तब सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए ऋण वसूली पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।
Tejashwi Yadav की मुख्यमंत्री से 5 प्रमुख मांगें
तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में सरकार के सामने किसानों के हक में निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
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ऋण वसूली पर रोक: आंधी-बारिश से प्रभावित किसानों और भूमिहीन मजदूरों के कृषि ऋण (लोन) की वसूली तत्काल प्रभाव से स्थगित की जाए।
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भौतिक सत्यापन और DBT: प्रभावित जिलों में अधिकारी खेतों में जाकर नुकसान का सही आकलन करें और मुआवजा राशि सीधे डीबीटी (DBT) के जरिए किसानों के खातों में भेजी जाए।
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मृतकों के परिजनों को सहायता: वज्रपात और अन्य हादसों में जान गंवाने वालों के परिवारों को बिना देरी के अनुग्रह राशि (Ex-gratia) दी जाए।
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आवेदन प्रक्रिया का सरलीकरण: फसल क्षति के लिए ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और इसकी समयसीमा बढ़ाई जाए।
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मुफ्त खाद-बीज: अगली फसल की तैयारी के लिए प्रभावित क्षेत्रों में मुफ्त खाद और उन्नत बीज उपलब्ध कराए जाएं।
इन फसलों पर पड़ा है सबसे बुरा असर
तेजस्वी ने पत्र में बताया कि बेमौसम बारिश और तेज हवा के कारण रबी फसलों को भारी क्षति हुई है:
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अनाज: गेहूं, मक्का और दलहन (दालों) की फसलें खेतों में गिरकर बर्बाद हो गई हैं।
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बागवानी: ओलावृष्टि से आम और लीची के मंजर (बौर) झड़ गए हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
पूरे बिहार में कुदरत का कहर: Tejashwi Yadav
पिछले एक हफ्ते में कोसी, सीमांचल, उत्तर और दक्षिण बिहार के कई जिलों में प्रकृति ने तांडव मचाया है। तेज हवा से खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गई हैं, वहीं आकाशीय बिजली गिरने से कई जिलों में मौतें भी हुई हैं। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सरकार इसे प्राथमिकता पर ले और बिना किसी प्रशासनिक देरी के राहत कार्यों की घोषणा करे।
फिलहाल राज्य प्रशासन द्वारा जिलों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। तेजस्वी के इस पत्र ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह केवल कागजी सर्वे तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करे।
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