दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आज मिलेगा पद्मभूषण सम्मान, पत्नी रूपी सोरेन करेंगी ग्रहण
Ranchi: झारखंड आंदोलन के महानायक, पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिवंगत शिबू सोरेन को मंगलवार को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में यह सम्मान उनकी पत्नी रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी। इस दौरान गांडेय विधायक और उनकी बहू कल्पना सोरेन भी मौजूद रहेंगी।
दोनों सोमवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा सम्मान ग्रहण किए जाने की चर्चा थी, लेकिन झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि परिवार की ओर से रूपी सोरेन और कल्पना सोरेन समारोह में शामिल होंगी।
झारखंड आंदोलन के संघर्ष को मिला राष्ट्रीय सम्मान
शिबू सोरेन को सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान और अलग झारखंड राज्य के निर्माण में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका के लिए पद्मभूषण सम्मान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और झारखंड राज्य गठन के लिए दशकों तक संघर्ष किया।
उनके नेतृत्व में आदिवासी और मूलवासी समाज को एक मजबूत राजनीतिक पहचान मिली। झारखंड आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनकी भूमिका को निर्णायक माना जाता है।
25 जनवरी को हुई थी घोषणा
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद पूरे झारखंड में खुशी और गौरव का माहौल देखने को मिला था।
झारखंड के लिए गर्व का क्षण
4 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी के बाद शिबू सोरेन का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद दिया जा रहा यह सम्मान उनके संघर्षपूर्ण जीवन, सामाजिक योगदान और राजनीतिक विरासत को समर्पित माना जा रहा है।
राज्यभर में झामुमो कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों के बीच इस सम्मान को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोग इसे झारखंड के लिए गर्व का क्षण बता रहे हैं।
संघर्ष से सम्मान तक
दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत आदिवासियों और गरीबों के हक की लड़ाई से की थी। उन्होंने महाजनी प्रथा, शोषण और सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाई और झारखंड आंदोलन को जनआंदोलन का स्वरूप दिया। आज पद्मभूषण सम्मान उनके उसी संघर्ष और योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति माना जा रहा है।
