Deoghar Holi: बाबा बैद्यनाथ धाम में गुलाल अर्पित होते ही शुरू हुई होली

बाबा बैद्यनाथ धाम में गुलाल अर्पित होते ही शुरू हुई होली, हरिहर मिलन और फगडोल से गूंजा देवघर

देवघर: परंपरा के अनुसार बाबा बैद्यनाथ पर गुलाल (Deoghar Holi) अर्पित होते ही सोमवार से बाबा नगरी देवघर में होली की औपचारिक शुरुआत हो गई।

मंदिर महंत सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा ने बाबा पर गुलाल अर्पित कर इस पावन परंपरा की शुरुआत की। इसके साथ ही पूरा मंदिर परिसर जयकारों और रंगों से गूंज उठा।

पूरी रात मंदिर का पट खुला रहा और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बाबा पर गुलाल अर्पित कर दर्शन किए। हालांकि इस दौरान आम श्रद्धालुओं को शिवलिंग स्पर्श की अनुमति नहीं थी।

Deoghar Holi: साढ़े चार बजे खुला पट, विधिवत हुआ गुलाल अर्पण

सोमवार शाम करीब सवा चार बजे मंदिर का पट बंद किया गया और साढ़े चार बजे पुनः खोला गया। सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा, पुजारी राकेश झा, पुरोहित दुर्गा प्रसाद और उपचारक भक्ति नाथ फलहारी ने गर्भगृह में प्रवेश कर विधिवत शिवलिंग की सफाई की।

मलमल के वस्त्र से पोंछने के बाद बाबा पर गुलाल अर्पित किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भी बारी-बारी से बाबा को गुलाल चढ़ाया। यह क्रम पूरी रात चलता रहा।

Deoghar Holi: निकला भव्य फगडोल, जयकारों से गूंजा शहर

गुलाल अर्पण के बाद राधा-कृष्ण मंदिर से भगवान कृष्ण और राधारानी को फगडोल पर विराजमान कराया गया। टहलुआ अरुण राउत, दीवान सोना सिन्हा और भंडारी टीम ने फगडोल को कंधे पर उठाया।

“जय कन्हैया लाल की” और “मदन गोपाल की जय” के जयघोष के बीच फगडोल मंदिर की परिक्रमा करते हुए पश्चिम द्वार से बाहर निकला। मुख्य बाजार से होते हुए आजाद चौक स्थित दोल मंच तक पहुंचा, जहां भगवान को झुलाने की परंपरा निभाई गई।

हर चौक-चौराहे पर श्रद्धालुओं ने गुलाल अर्पित कर भगवान का स्वागत किया और मालपुआ का भोग लगाया गया।

अल सुबह 5:11 बजे होलिका दहन

मंगलवार अल सुबह दोल मंच पर पुजारी दुर्गा प्रसाद द्वारा होलिका पूजन के बाद निर्धारित समय सुबह 5:11 बजे होलिका दहन किया गया।

इसके पश्चात भगवान हरि और राधा को पुनः फगडोल पर सवार कर मंदिर लाया गया। पूरब द्वार से प्रवेश के बाद गर्भगृह में ‘हरि और हर’ का मिलन कराया गया, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Deoghar Holi: छप्पन भोग और शृंगार पूजा

हरिहर मिलन के बाद भितरखंड में विशेष पूजा-अर्चना की गई और भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया। सुबह करीब साढ़े छह बजे शृंगार पूजा के बाद पट बंद किया गया।

सवा सात बजे पट पुनः खोलकर कांचाजल पूजा और सरदारी पूजा संपन्न की गई। करीब नौ बजे से आम भक्तों के लिए जलार्पण शुरू कर दिया गया।

देवघर में इस परंपरा को बाबा के स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जिससे होली का उत्सव आध्यात्मिक रंग में रंग जाता है।

यह भी पढ़े: सियासत में एंट्री के साथ ही राज्यसभा जाएंगे निशांत?

Exit mobile version