₹42 हजार मजदूरी और ₹21 हजार पेंशन की मांग! 1 दिसंबर को दिल्ली कूच करेंगे बोकारो के मजदूर

बोकारो के सैकड़ों मजदूर 1 दिसंबर को दिल्ली में संसद मार्च करेंगे। सीटू ने ₹42 हजार न्यूनतम मजदूरी, ₹21 हजार पेंशन और चारों श्रम संहिताएं रद्द करने की मांग उठाई।

1 दिसंबर को दिल्ली कूच करेंगे बोकारो के सैकड़ों मजदूर, संसद मार्च में उठाएंगे श्रमिकों के हक की आवाज

बोकारो: मजदूरों के अधिकार, सम्मानजनक मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर बोकारो के सैकड़ों मजदूर 1 दिसंबर को दिल्ली कूच करेंगे। ये मजदूर 1 से 3 दिसंबर 2026 तक आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी ‘दिल्ली चलो–दिल्ली में डेरा डालो’ कार्यक्रम में शामिल होकर संसद मार्च करेंगे। इस दौरान चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने, 42 हजार रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी और 21 हजार रुपये पेंशन समेत कई मांगें उठाई जाएंगी।

इस आंदोलन का आह्वान सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने किया है। शुक्रवार, 6 नवंबर को सेक्टर-9 स्थित सीटू कार्यालय में यूनियन पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में दिल्ली मार्च की तैयारियों और मजदूरों की प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई।

मजदूरों के अधिकारों के लिए एकजुटता जरूरी: आरके गोरांई

बैठक को संबोधित करते हुए सीटू के महामंत्री आरके गोरांई ने कहा कि 1 दिसंबर का संसद मार्च मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए चलाए जा रहे व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का हिस्सा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बढ़ती आर्थिक असमानता, सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण और प्राकृतिक संसाधनों पर कॉरपोरेट घरानों का बढ़ता प्रभाव मेहनतकश लोगों की आजीविका के लिए चुनौती बन रहा है।

गोरांई ने ग्रामीण रोजगार गारंटी को कमजोर करने वाली नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि इसका असर मजदूरों, किसानों, आदिवासियों और गरीब तबकों पर पड़ रहा है। उन्होंने रोजगार, सम्मानजनक मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और श्रम अधिकारों की रक्षा के लिए मजदूरों-किसानों की एकजुटता को जरूरी बताया।

₹42 हजार न्यूनतम मजदूरी और ₹21 हजार पेंशन की मांग

सीटू की ओर से संसद मार्च के दौरान कई प्रमुख मांगें उठाई जाएंगी। इनमें चारों श्रम संहिताओं को रद्द कर पुराने श्रम अधिकारों, सामूहिक सौदेबाजी और ट्रेड यूनियन की स्वतंत्रता बहाल करने की मांग शामिल है।

यूनियन की प्रमुख मांगें हैं:

औद्योगिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन की स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठेगा

सीटू ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और औद्योगिक दुर्घटनाओं की रोकथाम की मांग भी रखी है। इसके साथ ही हड़ताल और ट्रेड यूनियन गतिविधियों पर कथित दमन बंद करने की मांग की जाएगी।

यूनियन का कहना है कि जल, जंगल और जमीन पर मजदूरों, किसानों एवं आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। विस्थापन पर रोक लगाने के साथ प्रभावित परिवारों के लिए उचित पुनर्वास और रोजगार सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई जाएगी।

मनरेगा बहाली और खनन प्रभावितों के अधिकार भी एजेंडे में

संसद मार्च में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और प्रवासी मजदूरों समेत सभी पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा का मुद्दा भी उठाया जाएगा।

इसके अलावा MMDR संशोधन के संदर्भ में खनिज संपन्न राज्यों के राजस्व और अधिकारों की गारंटी तथा खनन प्रभावित मजदूरों, किसानों, आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के हितों की रक्षा की मांग की जाएगी।

सीटू की मांगों में VB-G RAM G अधिनियम, 2025 को रद्द कर मनरेगा बहाल करना भी शामिल है। यूनियन प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 200 दिन काम, वैधानिक न्यूनतम मजदूरी, समय पर भुगतान और पर्याप्त केंद्रीय धन उपलब्ध कराने की मांग करेगी।

फिलहाल बोकारो में दिल्ली मार्च की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 1 दिसंबर को होने वाला यह संसद मार्च मजदूर संगठनों की विभिन्न मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का मंच बनेगा।

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