मरांगबुरु के लिए एकजुट होगा आदिवासी समाज! CM हेमंत सोरेन ने दिया बड़ा संदेश

गिरिडीह के मधुबन में मरांगबुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन को संबोधित करते हुए CM हेमंत सोरेन ने कहा कि मरांगबुरु आदिवासी समाज की आस्था और पहचान का प्रतीक है।

मरांगबुरु हमारी आस्था और पहचान का प्रतीक, संरक्षण के लिए एकजुट होना जरूरी: CM हेमंत सोरेन

गिरिडीह: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि मरांगबुरु केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है। अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए पूरे समाज को एकजुट होकर आगे आना होगा। मुख्यमंत्री गुरुवार को गिरिडीह के मधुबन में आयोजित मरांगबुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

इस महासम्मेलन में झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत देश के विभिन्न राज्यों से आदिवासी समाज के अगुआ, सामाजिक प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने मंच से सभी का पारंपरिक संबोधन ‘जोहार’ के साथ स्वागत और अभिनंदन किया।

मरांगबुरु आदिवासी समाज की आस्था और ऐतिहासिक पहचान

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने महासम्मेलन में शामिल हुए लोगों और सामाजिक प्रतिनिधियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि समाज, धर्म, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के संरक्षण को लेकर जिस परिपक्वता के साथ लोगों ने अपने विचार रखे हैं, वह सराहनीय है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि मरांगबुरु पूरे आदिवासी समाज की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस धरोहर का संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संगठन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।

एकजुटता से मजबूत होगी समाज की ताकत

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज से अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जब समाज के सभी लोग एक साथ खड़े होंगे, तो उनकी सामूहिक ताकत इतनी बड़ी होगी कि विरोधियों के लिए उनकी संख्या और एकजुटता का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाएगा।

मुख्यमंत्री के इस संदेश के केंद्र में समाज की एकता और अपनी पहचान को सुरक्षित रखने का संकल्प रहा।

आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प

महासम्मेलन के दौरान आदिवासी समाज की धर्म-संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक पहचान की रक्षा के साथ आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों को सुरक्षित रखने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

मरांगबुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों की भागीदारी ने इस आयोजन को व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप दिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के जरिए समाज को अपनी जड़ों, परंपराओं और विरासत के संरक्षण के लिए एकजुट रहने का संदेश दिया।

↑
Exit mobile version