झारखंड में महिला-बाल विकास के बजट में 1.50 करोड़ की बढ़ोतरी, बुजुर्गों और नशा रोकथाम पर भी फोकस

झारखंड सरकार ने महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के जागरूकता कार्यक्रमों के लिए 2026-27 में 5.37 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। पिछले वर्ष की तुलना में करीब 1.50 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।

झारखंड में महिला-बाल विकास के जागरूकता कार्यक्रमों का बजट बढ़ा, 2026-27 में 5.37 करोड़ रुपये का प्रावधान

रांची: झारखंड सरकार ने महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए बजट में राशि बढ़ाई है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सेमिनार, कार्यशालाओं और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के लिए कुल 5 करोड़ 37 लाख 54 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है।

पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन मदों के लिए करीब 3.87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। इस तरह एक साल में बजट प्रावधान में लगभग 1.50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इन कार्यक्रमों के तहत महिला एवं बाल विकास, जनजातीय क्षेत्रों के कल्याण, नशा रोकथाम और बुजुर्गों सहित समाज के कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

महिला और बाल विकास से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 1.62 करोड़

विभाग के बजट में महिला एवं बाल विकास से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 1 करोड़ 62 लाख 54 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। पिछले वित्तीय वर्ष में इस मद के सामने कोई राशि दर्ज नहीं थी।

इसके अलावा जनजातीय क्षेत्र उपयोजना के तहत महिला एवं बाल विकास से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 1 करोड़ 44 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। एक अन्य मद में 25 लाख रुपये का प्रावधान है।

जनजातीय क्षेत्र उपयोजना के सामान्य कार्यक्रमों के लिए 73 लाख रुपये रखे गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में इस मद में 74 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान था।

वहीं, मुख्यमंत्री समाज कल्याणार्थ योजना के लिए 84 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।

नशा रोकथाम के लिए 33 लाख रुपये का बजट

राज्य में नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम और इससे जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों के लिए 33 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष के अनुमान के बराबर है।

सरकार का उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना और इस दिशा में सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।

बुजुर्गों और निराश्रित लोगों के कल्याण पर भी जोर

वृद्ध, अशक्त और निराश्रित व्यक्तियों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 11 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा राज्य के विभिन्न आयोगों, बोर्डों, मिशनों, संस्थानों और कार्यालयों से संबंधित कार्यशालाओं के आयोजन के लिए पांच लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

बजट बढ़ा, अब खर्च और क्रियान्वयन पर रहेगी नजर

विभाग के बजट में अलग-अलग सामाजिक मुद्दों और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए राशि निर्धारित की गई है। बजट में बढ़ोतरी से इन क्षेत्रों में अधिक कार्यक्रम आयोजित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

हालांकि, बजट में राशि का प्रावधान होना और उसका वास्तविक खर्च होना अलग-अलग बातें हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में निर्धारित राशि कितनी जारी होती है और इसके जरिए जमीनी स्तर पर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों तथा कमजोर वर्गों को कितना लाभ मिल पाता है।

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