झारखंड में HPV टीकाकरण पर गहन अध्ययन के बाद फैसला, हेमन्त सोरेन ने दिए सर्वे के निर्देश

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने HPV टीकाकरण पर निर्णय से पहले राज्यव्यापी सर्वे, विशेषज्ञ समिति और चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श के निर्देश दिए। रिम्स के 319 मेडिकल शिक्षकों के पदों के पुनर्गठन पर भी चर्चा हुई।

झारखंड में HPV टीकाकरण पर गहन अध्ययन के बाद होगा फैसला, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने दिए सर्वे और विशेषज्ञ समिति के गठन के निर्देश

 

रांची: झारखंड की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए प्रस्तावित एचपीवी (HPV) टीकाकरण पर राज्य सरकार जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेगी। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि टीकाकरण लागू करने से पहले इस विषय पर व्यापक अध्ययन कराया जाए। उन्होंने राज्यव्यापी सर्वेक्षण, विशेषज्ञ समिति के गठन और देश-विदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श लेने का निर्देश दिया।

 

4 नवंबर 2026 को झारखंड मंत्रालय में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, रिम्स में चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार, मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था, स्वास्थ्य बीमा योजनाएं और सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाएं शामिल रहीं।

 

HPV टीकाकरण पर सर्वे और विशेषज्ञों की राय के बाद होगा निर्णय

 

बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि झारखंड में सर्वाइकल कैंसर के मामलों का अनुमानित आंकड़ा प्रति एक लाख आबादी पर 13 है।

 

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य की बेटियों और महिलाओं का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है और इसकी रोकथाम के लिए सरकार पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कदम उठाएगी।

 

उन्होंने निर्देश दिया कि एचपीवी टीकाकरण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने से पहले पूरे राज्य में सर्वेक्षण कराया जाए। इसके माध्यम से सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या, आयु वर्ग, बीमारी के अलग-अलग चरणों और सक्रिय मामलों का विस्तृत आंकड़ा जुटाया जाएगा। इसके आधार पर समग्र रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

 

मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों की समिति गठित करने और देश-विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के निदेशकों, कैंसर विशेषज्ञों तथा संबंधित विषय के विशेषज्ञों से परामर्श लेने का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि टीकाकरण के वैज्ञानिक, तकनीकी, चिकित्सकीय और सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाए।

 

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को समाज में किसी तरह की अफवाह या भ्रांति नहीं फैलने देने और प्रमाणिक जानकारी के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश भी दिया।

 

सर्वाइकल कैंसर की जांच व्यवस्था होगी मजबूत

 

मुख्यमंत्री ने सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान और रोकथाम के लिए नियमित स्क्रीनिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में पैप स्मीयर टेस्ट तथा एचपीवी डीएनए टेस्ट जैसी जांच सुविधाओं की उपलब्धता और पहुंच बेहतर बनाने के निर्देश दिए।

 

उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए समय पर जांच, जागरूकता और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं बेहद जरूरी हैं। इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग प्रभावी कार्ययोजना तैयार करे।

 

रिम्स में 319 मेडिकल शिक्षकों के पदों का होगा पुनर्गठन

 

बैठक में रांची स्थित राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

 

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को रिम्स के विभिन्न विभागों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, मरीजों के उपचार, ओपीडी व्यवस्था, मेडिकल सीटों और छात्रावासों की स्थिति की जानकारी दी।

 

इस दौरान रिम्स में मेडिकल शिक्षकों के कुल 319 स्वीकृत पदों के पुनर्गठन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इसके तहत 7 सुपर स्पेशियलिटी और 3 ब्रॉड स्पेशियलिटी विभागों के सृजन का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों को देखते हुए 16 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

 

मेडिकल शिक्षकों के पदों का प्रस्तावित विवरण

 

पद| वर्तमान पद| प्रस्तावित पद

प्राध्यापक| 44| 42

अपर प्राध्यापक| 09| 08

सह-प्राध्यापक| 95| 96

सहायक प्राध्यापक| 170| 172

सहायक प्राध्यापक-सह-सांख्यिकी| 01| 01

कुल| 319| 319

 

प्रस्तावित पुनर्गठन का उद्देश्य रिम्स में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देना, सुपर स्पेशियलिटी और ब्रॉड स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार करना तथा योग्य मेडिकल शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि रिम्स में मरीजों को बेहतर उपचार और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा मिलनी चाहिए।

 

हजारीबाग, दुमका और पलामू मेडिकल कॉलेजों की भी समीक्षा

 

बैठक में रिम्स के अलावा हजारीबाग, दुमका और पलामू स्थित मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक और चिकित्सकीय व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।

 

इन संस्थानों में आधारभूत संरचना, मेडिकल शिक्षकों की उपलब्धता, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य जरूरी संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

 

अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 10 लाख रुपये तक के लाभ पर चर्चा

 

बैठक में मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने योजना के तहत उपलब्ध स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी।

 

योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को 10 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने से संबंधित प्रावधानों और आयुष्मान भारत योजना के साथ इसके समन्वय पर विचार-विमर्श किया गया।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचे और उपचार के दौरान जरूरतमंद लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

 

सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाएं बेहतर करने का निर्देश

 

मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति और उनके प्रभावी संचालन की भी समीक्षा की। उन्होंने राज्यवासियों को समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए एम्बुलेंस व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

 

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए आधारभूत संरचना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, चिकित्सा शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।

 

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

 

बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, विशेष सचिव नेहा अरोड़ा, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के निदेशक और भवन निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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