झारखंड में SIR की समयसीमा एक महीने बढ़ाने की मांग, 19.31 लाख लंबित नोटिस पर कांग्रेस ने जताई चिंता
रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। बुधवार को झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार से मुलाकात कर मौजूदा समयसीमा 23 नवंबर से एक महीने बढ़ाने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि राज्य में जारी किए गए 59.56 लाख से अधिक नोटिसों में से करीब 19.31 लाख मामलों का निपटारा अब भी लंबित है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता समेत पार्टी के अन्य नेताओं ने निर्वाचन पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि निर्धारित समय में सभी मामलों का निपटारा करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में समयसीमा बढ़ाकर वास्तविक मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।
19.31 लाख नोटिस लंबित, कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश प्रभारी के. राजू ने बताया कि झारखंड में अब तक 59,56,574 नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से 40,25,102 मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि 19,31,472 मामले अभी लंबित हैं। उनके मुताबिक, करीब 33 प्रतिशत मामलों का निपटारा होना बाकी है।
के. राजू ने कहा कि फिलहाल प्रतिदिन लगभग 50 हजार मामलों का निपटारा हो रहा है। इस गति से 23 नवंबर तक सभी लंबित मामलों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होगा। उनका कहना था कि तय समयसीमा में काम पूरा करने के लिए निपटारे की रफ्तार करीब ढाई गुना बढ़ानी पड़ेगी।
उन्होंने त्योहारों के दौरान होने वाली व्यस्तता का भी जिक्र किया। कांग्रेस का कहना है कि जल्दबाजी में प्रक्रिया पूरी होने से बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से छूट सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पार्टी ने एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा है।
शिल्पी नेहा तिर्की बोलीं- झारखंड की परिस्थितियां अलग
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि झारखंड की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियां दूसरे राज्यों से अलग हैं। यह जनजातीय बहुल राज्य है और यहां बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए पलायन करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेजों को लेकर भी लोगों के बीच कई तरह की आशंकाएं हैं।
उन्होंने कहा कि दीपावली और अन्य त्योहारों के कारण भी SIR की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में जल्दबाजी में प्रक्रिया पूरी करने से वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं।
शिल्पी नेहा तिर्की ने दिल्ली में SIR की समयसीमा 22 दिसंबर तक बढ़ाए जाने का हवाला देते हुए झारखंड में भी अतिरिक्त समय देने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य में फिलहाल कोई चुनाव नहीं है, इसलिए प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि कोई भी योग्य मतदाता मतदाता सूची से बाहर न हो।
आदिवासी इलाकों में SIR को लेकर परेशानी का दावा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि लातेहार, खूंटी, रांची और गुमला के कुछ क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के लोगों को SIR की प्रक्रिया में परेशानी हो रही है। उनके मुताबिक, कई जगहों पर लोगों ने गणना प्रपत्र भरने से इनकार किया है।
उन्होंने दावा किया कि ग्रामीणों के बीच यह आशंका है कि दस्तावेज मांगे जाने के बाद उनकी जमीन से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद कुछ लोगों को दोबारा गणना प्रपत्र जारी किए गए हैं।
कांग्रेस ने ऐसे मामलों में आदिवासी मतदाताओं के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी करने और इस मुद्दे को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के समक्ष उठाने की मांग की है।
निर्वाचन पदाधिकारी ने दिया विचार करने का आश्वासन
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से रखे गए तथ्यों और मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने SIR की प्रक्रिया की लगातार निगरानी किए जाने की बात कही।
हालांकि, समयसीमा एक महीने बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय या स्पष्ट सहमति सामने नहीं आई है।
बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने घुसपैठियों के नाम पर मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि अब तक एक भी घुसपैठिया सामने नहीं आया है और मतदाता सूची में दर्ज संबंधित नाम वास्तविक मतदाताओं के हैं।
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से अपील की कि SIR की प्रक्रिया में किसी भी पात्र मतदाता का नाम नहीं छूटना चाहिए। अब देखना होगा कि निर्वाचन आयोग कांग्रेस की मांग पर क्या निर्णय लेता है और झारखंड में SIR की मौजूदा समयसीमा में कोई बदलाव होता है या नहीं।
