दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दूसरे दिन झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने राज्य के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे केंद्र सरकार के समक्ष उठाए। उन्होंने केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मनरेगा की लंबित राशि जारी करने, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने और प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि में वृद्धि सहित कई मांगें रखीं।
मनरेगा के 900 करोड़ रुपये जल्द जारी करने की मांग
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के पास झारखंड के मनरेगा मटेरियल मद के लगभग 900 करोड़ रुपये लंबित हैं। इस राशि के भुगतान में देरी से ग्रामीण विकास की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने केंद्र से जल्द बकाया राशि जारी करने का आग्रह किया।
मनरेगा मजदूरी बढ़ाकर 433 रुपये करने की मांग
मंत्री ने बढ़ती महंगाई का हवाला देते हुए झारखंड में मनरेगा मजदूरों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी 282 रुपये से बढ़ाकर 433 रुपये करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान मजदूरी दर मजदूरों की जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
PM आवास योजना की राशि 2 लाख रुपये करने का सुझाव
दीपिका पांडेय सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि को 2 लाख रुपये तक बढ़ाने की मांग की। साथ ही उन्होंने मजबूत फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर वाले आवास बनाने और लाभार्थियों को एकमुश्त भुगतान की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाया।
‘वी बी ग्राम जी’ योजना पर भी उठाए सवाल
सम्मेलन में मंत्री ने ‘विकसित ग्रामीण भारत (VB Gram Ji)’ योजना में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 वित्तीय हिस्सेदारी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे झारखंड जैसे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। साथ ही उन्होंने योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और महात्मा गांधी के नाम से नई जनहित योजना शुरू करने की मांग की।
SHG और रूरल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की अपील
दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि झारखंड में लगभग 32 लाख स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएं उद्यमिता से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत उत्पादित आम दुबई, लंदन और इटली तक निर्यात हो रहे हैं, जबकि पलाश और अदिवा ब्रांड की पहचान देशभर में बन रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार से ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने और इन उत्पादों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि राज्य की महिलाओं को अधिक आर्थिक अवसर मिल सकें।
