Bihar में बदलेगा सत्ता समीकरण, BJP तय करेगी अगला मुख्यमंत्री

20 साल बाद बदलेगा खेल? बिहार में BJP बना सकती है अपना CM

पटना | Bihar की राजनीति इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। करीब दो दशकों तक सत्ता के केंद्र में रही जदयू अब ऐसे मोड़ पर खड़ी दिख रही है, जहां से नेतृत्व की कमान बीजेपी के हाथों में जाती नजर आ रही है।

हालात ऐसे बन रहे हैं कि अब राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला भारतीय जनता पार्टी करेगी।

Bihar Polictics: 20 साल की सत्ता, लेकिन अब बदलते समीकरण

बीते 20 वर्षों में जदयू ने भले ही कम सीटों के बावजूद मुख्यमंत्री पद अपने पास रखा, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती दिख रही हैं। जदयू के ही वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी के बयान ने इस बदलाव को और स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अब मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला बीजेपी ही करेगी।

शिवराज सिंह चौहान बने पर्यवेक्षक

बीजेपी ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार में पर्यवेक्षक बनाकर भेजा है। उनके जिम्मे विधायक दल की बैठक कर नए नेता का चयन कराने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी इस बार नेतृत्व अपने हाथ में लेना चाहती है।

Bihar News: पटना में हलचल तेज, बैरिकेडिंग से संकेत

राजधानी पटना में जिस तरह से शपथ ग्रहण को लेकर तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है, उससे साफ है कि राज्य में बड़ा सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। लंबे समय बाद बिहार में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलते दिख रहे हैं।

BJP के लिए क्यों अहम है बिहार?

हिंदी पट्टी में बिहार ही एक ऐसा बड़ा राज्य रहा है, जहां अब तक बीजेपी अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी है। आजादी के दशकों बाद भी पार्टी यहां सत्ता में साझेदार तो रही, लेकिन शीर्ष पद तक नहीं पहुंच पाई। ऐसे में यह मौका बीजेपी के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है।

CM हाउस की बैठक और बढ़ी सस्पेंस

मुख्यमंत्री आवास पर जदयू नेताओं की बैठक के बाद जब मीडिया ने सवाल किया कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, तो जवाब मिला— “यह फैसला बीजेपी करेगी।” इस बयान के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है।

BJP विधायक दल की बैठक पर नजर

सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी विधायक दल की बैठक में सभी नेताओं की राय ली जाएगी। पर्यवेक्षक शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में नाम तय कर औपचारिक ऐलान किया जाएगा। माना जा रहा है कि अंतिम फैसला ‘बंद लिफाफे’ से सामने आ सकता है।

नीतीश युग का संकेतात्मक अंत?

इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना से बाहर निकलने के दौरान जदयू कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों का हटाया जाना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। यह घटनाक्रम संकेत दे रहा है कि राज्य में एक युग का अंत और नए नेतृत्व की शुरुआत होने जा रही है।

2014 से अब तक का सफर

अगर इतिहास के पन्ने पलटें, तो 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जदयू और बीजेपी के रिश्तों में आई दरार ने दोनों दलों को अलग कर दिया था। लेकिन अब एक बार फिर दोनों साथ हैं— और इस बार समीकरण पहले से बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं।

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