झारखंड में कुपोषण के खिलाफ सरकार की बड़ी पहल, आंगनबाड़ियों में पोषाहार की सप्लाई रहेगी निर्बाध
Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धातृ माताओं और किशोरियों को मिलने वाले पोषाहार की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के तहत पूरक पोषाहार कार्यक्रम और किशोरी बालिकाओं की योजना के संचालन में आ रही प्रशासनिक बाधाओं को दूर करते हुए सरकार ने पोषाहार की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया है।
सरकार ने लाभार्थियों को टेक होम राशन (THR) के रूप में दिए जाने वाले पौष्टिक आहार की आपूर्ति के लिए तीन आपूर्तिकर्ताओं के मनोनयन को मंजूरी दी है। यह व्यवस्था आगामी छह महीने या नई निविदा के जरिए कार्यादेश जारी होने तक लागू रहेगी।
6 महीने तक जारी रहेगी पोषाहार की आपूर्ति
सरकारी निर्णय के तहत मेसर्स इंटरलिंक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स आदित्य फ्लॉर मिल और मेसर्स कोटा दाल मिल को छह महीने के लिए अथवा नई निविदा से कार्यादेश जारी होने तक, जो भी पहले हो, पोषाहार आपूर्ति के लिए अधिकृत किया गया है।
इस फैसले का उद्देश्य नई निविदा प्रक्रिया पूरी होने तक पोषाहार वितरण में किसी तरह की रुकावट नहीं आने देना है।
किन लाभार्थियों को मिलेगा पौष्टिक आहार?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत आंगनबाड़ियों के माध्यम से विभिन्न वर्गों को पूरक पोषाहार उपलब्ध कराया जाता है।
इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- 6 से 36 माह के बच्चे
- 6 से 72 माह के अतिकुपोषित बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- धातृ माताएं
- 14 से 18 वर्ष की किशोरियां
लाभार्थियों को शिशु आहार, पौष्टिक मीठा दलिया और नमकीन दलिया जैसे पोषक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं। योजना के तहत साल में 300 दिनों तक पोषाहार उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
आपूर्ति में क्यों आई थी परेशानी?
पूर्व में पोषाहार आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ताओं के साथ अनुबंध जनवरी 2025 में समाप्त होना था। इसे विभिन्न सरकारी निर्णयों के जरिए कुल 12 महीने यानी जनवरी 2026 तक बढ़ाया गया था।
इस दौरान प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं, गुणवत्ता जांच और अन्य राज्यादेशों के अनुपालन के कारण पोषाहार की आपूर्ति में कुछ बैकलॉग की स्थिति बनी।
नई निविदा प्रक्रिया पूरी होने में करीब 5 से 6 महीने लगने की संभावना को देखते हुए सरकार ने अंतरिम व्यवस्था के तहत आपूर्ति जारी रखने का फैसला लिया है।
फरवरी और मार्च 2026 की आपूर्ति भी होगी विनियमित
सरकार ने फरवरी और मार्च 2026 के दौरान संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से की गई पोषाहार की आपूर्ति और वितरण को भी विधिवत विनियमित करने का प्रावधान किया है।
इससे उस अवधि में हुई आपूर्ति को प्रशासनिक स्तर पर नियमित करने का रास्ता साफ होगा।
नई निविदा प्रक्रिया पर भी जोर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि छह महीने की अंतरिम अवधि को स्थायी व्यवस्था के तौर पर नहीं देखा जाएगा। इस दौरान प्रशासी विभाग को खुली निविदा के माध्यम से नए आपूर्तिकर्ताओं का चयन करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सरकार के इस फैसले से फिलहाल आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े लाखों लाभार्थियों को मिलने वाले पोषाहार की आपूर्ति में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
