JSSC TGT शिक्षक नियुक्ति केस: 150 अंक वाले का चयन, 166 अंक वाले को नौकरी नहीं; फैक्ट फाइंडिंग कमिटी में सुनवाई
Ranchi: झारखंड में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक (TGT) प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर उठे सवालों पर फैक्ट फाइंडिंग कमिटी के समक्ष सुनवाई हुई। झारखंड हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय कमिटी के सामने हुई सुनवाई में अभ्यर्थियों की ओर से कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों के चयन और अधिक अंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति से बाहर रखने के आरोप लगाए गए। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होगी।
150 अंक वाले अभ्यर्थियों के चयन का मामला उठा
सुनवाई के दौरान जीव विज्ञान और रसायन शास्त्र विषय की अभ्यर्थी सोनी कुमारी की ओर से उनके अधिवक्ता ने नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
दलील दी गई कि सामान्य श्रेणी में उनकी मुवक्किल को 166 अंक मिले थे, जबकि खूंटी जिले में 150 अंक के कटऑफ से कम अंक पाने वाले कुछ अभ्यर्थियों को जुलाई 2019 में नियुक्ति दी गई।
अधिवक्ता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि JSSC की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण में कुछ चयनित अभ्यर्थियों के रोल नंबर और उनके माता-पिता के नाम तक दर्ज नहीं हैं।
उर्दू विषय में भी चयन प्रक्रिया पर सवाल
उर्दू विषय के अभ्यर्थियों तरन्नुम जहां और तबस्सुम जहां की ओर से भी चयन प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई।
अधिवक्ताओं ने कमिटी के समक्ष दावा किया कि EBC-1 श्रेणी में 226 से 244 अंक प्राप्त करने वाले कुछ अभ्यर्थियों को चयन से बाहर रखा गया, जबकि 222 अंक प्राप्त करने वाले एक अभ्यर्थी का चयन अनारक्षित (UR) श्रेणी में किया गया।
इन दावों के जरिए अभ्यर्थियों की ओर से चयन और मेरिट सूची में कथित विसंगतियों की जांच की मांग की गई।
कॉमर्स विषय में भी उठे सवाल
कॉमर्स विषय के मामलों का उदाहरण देते हुए भी अभ्यर्थियों के अधिवक्ताओं ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
दलील में कहा गया कि मई 2023 के दौरान 188 और 194 अंक प्राप्त करने वाले कुछ अभ्यर्थियों को धनबाद और चतरा जैसे जिलों में नियुक्ति दी गई, जबकि अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए।
हालांकि, ये सभी दावे सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से रखे गए हैं और इनकी अंतिम पुष्टि संबंधित जांच एवं रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही होगी।
2 अगस्त 2022 की तारीख को लेकर कमिटी ने स्पष्ट किया दायरा
सुनवाई के दौरान JSSC की ओर से सत्यजीत कुमार एवं अन्य बनाम झारखंड सरकार मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया गया।
आयोग की ओर से बताया गया कि 2 अगस्त 2022 से पहले अनुसूचित क्षेत्रों में हुई कुछ नियुक्तियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में कमिटी के समक्ष यह स्पष्ट किया गया कि 2 अगस्त 2022 के बाद संशोधित मेरिट सूची के विपरीत हुई नियुक्तियों की ही जांच के दायरे में लिया जा सकता है।
जिन याचिकाओं में अभ्यर्थियों की नियुक्ति की तारीख का उल्लेख नहीं है, उन पर विचार करने में भी दिक्कत बताई गई।
JSSC और राज्य सरकार को पिछले निर्देशों के अनुपालन का आदेश
फैक्ट फाइंडिंग कमिटी ने JSSC और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों को 12 सितंबर 2026 को जारी पिछले निर्देशों का अनुपालन अगली सुनवाई से पहले सुनिश्चित करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे पुराने हाईकोर्ट कैंपस में निर्धारित की गई है।
अगली सुनवाई में JSSC और राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजों तथा पिछले निर्देशों के अनुपालन की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
