गंगा तटीय क्षेत्रों में निर्माण पर सख्ती, बाढ़ से बचाव के लिए झारखंड सरकार का बड़ा प्लान

गंगा किनारे जमीन और मकान बनाने के बदलेंगे नियम, झारखंड सरकार तैयार करेगी फ्लड प्लेन जोनिंग प्लान

गंगा किनारे जमीन और मकान बनाने के बदलेंगे नियम, बाढ़ से बचाव के लिए झारखंड सरकार का बड़ा प्लान

Ranchi: झारखंड सरकार गंगा नदी के तटीय क्षेत्रों को बाढ़ की विभीषिका से सुरक्षित बनाने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। जल संसाधन विभाग ने गंगा नदी के लिए फ्लड प्लेन जोनिंग (Flood Plain Zoning), भूमि उपयोग नियमन (Land Use Regulation) और सतत बाढ़ जोखिम प्रबंधन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इस कार्य के लिए विभाग के मुख्य अभियंता (डिजाइन, मास्टर प्लानिंग एवं हाइड्रोलॉजी) की ओर से देश की प्रतिष्ठित एम्पैनल्ड कंसल्टेंसी फर्मों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।

120 दिनों में तैयार होगा मास्टर प्लान

सरकार ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए 120 दिनों (चार महीने) की समय-सीमा तय की है। चयनित कंसल्टेंसी फर्म गंगा नदी के जलस्तर, पूर्व में आई बाढ़ के पैटर्न, तटवर्ती क्षेत्रों की मिट्टी, भू-तकनीकी (Geotechnical) स्थिति और अन्य तकनीकी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करेगी।

अध्ययन के आधार पर ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य में बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सके और तटीय क्षेत्रों में सुरक्षित विकास सुनिश्चित हो।

फ्लड प्लेन जोनिंग से क्या बदलेगा?

फ्लड प्लेन जोनिंग के तहत गंगा नदी के किनारे स्थित क्षेत्रों को बाढ़ के खतरे के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि—

भूमि उपयोग के लिए बनेंगे नए नियम

सरकार लैंड यूज़ रेगुलेशन के माध्यम से नदी के बेहद करीब होने वाले अवैध और असुरक्षित निर्माण पर नियंत्रण की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य बाढ़ के दौरान जन-धन के नुकसान को कम करना और संवेदनशील क्षेत्रों में अनियोजित विकास को रोकना है।

आधुनिक तकनीक से होगा सर्वे

परियोजना के तहत केंद्रीय जल आयोग (CWC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार—

जैसे कार्य किए जाएंगे। इसके आधार पर वैज्ञानिक तरीके से बाढ़ प्रबंधन और सुरक्षित भूमि उपयोग की नीति तैयार की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस योजना के लागू होने से गंगा तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के जोखिम को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और सुरक्षित एवं सुनियोजित विकास सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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