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19 राज्यों में SIR का ऐलान, 37 करोड़ वोटर्स का होगा वेरिफिकेशन

30 मई से घर-घर जाएंगे BLO, 37 करोड़ मतदाताओं का होगा सत्यापन

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने देशभर में मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए गुरुवार को 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तीसरे चरण की घोषणा कर दी। इस चरण में हरियाणा, झारखंड, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर समेत कुल 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

चुनाव आयोग के अनुसार, यह प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर 2026 तक चलेगी। इस दौरान करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। जिन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर प्रमुख हैं।

घर-घर जाकर होगा वोटर वेरिफिकेशन: SIR

SIR प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे चरण में करीब 3.94 लाख BLO तैनात किए जाएंगे। इनके साथ राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी सहयोग करेंगे। हर राज्य के लिए अलग-अलग शेड्यूल तय किया गया है और 30 मई से यह अभियान जमीनी स्तर पर शुरू हो जाएगा।

तीन राज्यों को छोड़ पूरे देश में पूरी होगी प्रक्रिया: SIR

तीसरे चरण के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर देशभर में SIR की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। चुनाव आयोग ने बताया कि इन क्षेत्रों में खराब मौसम और जनगणना संबंधी कारणों से फिलहाल शेड्यूल जारी नहीं किया गया है।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा वोटर: SIR

तीसरे चरण में शामिल राज्यों में महाराष्ट्र में सबसे अधिक मतदाता हैं, जबकि दादरा और नगर हवेली एवं दमन-दीव में वोटरों की संख्या सबसे कम है।

पहले दो चरणों में 59 करोड़ वोटर्स कवर: SIR

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का फैसला लिया था। पहले और दूसरे चरण में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया जा चुका है। इन दोनों चरणों में करीब 59 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया गया था। इस दौरान करीब 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में शामिल हुए थे।

क्या है SIR?

SIR यानी Special Intensive Revision चुनाव आयोग की विशेष प्रक्रिया है, जिसके जरिए मतदाता सूची की गहन जांच और अपडेट किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि वोटर लिस्ट में सिर्फ पात्र और वास्तविक मतदाताओं के नाम ही शामिल रहें। इस प्रक्रिया में मृत, डुप्लीकेट या अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाते हैं।

SIR पर राजनीति भी तेज

इधर SIR को लेकर राजनीतिक विवाद भी जारी है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी और दावा किया था कि पश्चिम बंगाल की 31 सीटों पर जीत का अंतर SIR के दौरान हटाए गए वोटों से कम था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नई याचिका दाखिल करने की अनुमति दी है। अब तीसरे चरण की शुरुआत के साथ ही देश की राजनीति में SIR एक बार फिर चर्चा का बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है।

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